कीर्तन मंडलियों द्वारा के साथ 2026 का स्वागत

  • कल्पना सोसाइटी, वैशाली ने साल 2026 की शुरुआत इतने सुंदर और भक्तिमय तरीके से की
  • भक्तिमय माहौल: स्थानीय गायकों और कीर्तन मंडलियों द्वारा प्रस्तुत भजनों पर सोसाइटी के बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने एक साथ मिलकर नृत्य किया और भक्ति का आनंद लिया।
  • सामूहिक प्रार्थना: ‘हैप्पी न्यू ईयर’ के साथ भगवान के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। निवासियों ने 2026 के लिए सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की।

कल्पना सोसाइटी, वैशाली की नवर्तमान RWA कार्यकारिणी टीम ने इतनी सक्रियता के साथ 2026 का स्वागत किया है। अध्यक्ष रवींद्र सिंह रावत जी के नेतृत्व में इस टीम ने भक्ति और संस्कृति को जो महत्व दिया है, वह सराहनीय है।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में जिन प्रमुख चेहरों का योगदान रहा, उनकी सूची और उनके प्रयासों का विवरण यहाँ दिया गया है:अध्यक्ष श्री रवींद्र सिंह रावत ,

कल्पना सोसाइटी RWA कार्यकारिणी टीम (2026)

पदनाम
अध्यक्षश्री रवींद्र सिंह रावत
महासचिवश्री तरुण
उपाध्यक्षश्रीमती मधु
कोषाध्यक्षश्री रोहित रावत

कार्यकारिणी सदस्य :

बीना रावत, मोनी गुप्ता ,लाल सिंह बिष्ट, दीपा डोडियाल, बीना पालीवाल, दीपा नेगी, पुष्पा लमकोटी, सुनीता दुष्यंत और भागीरथी चंदोलिया


आयोजन की मुख्य झलकियाँ

  • गर्जिया नैना कीर्तन मंडली का जादू: इस उत्सव का मुख्य आकर्षण गर्जिया नैना कीर्तन मंडली की प्रस्तुति रही। उनकी सुरीली और भक्तिपूर्ण आवाज़ ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया।
  • सामूहिक नृत्य और उत्साह: कीर्तन मंडली के भजनों पर अध्यक्ष रवींद्र सिंह रावत और उनकी पूरी टीम के साथ-साथ सोसाइटी के निवासियों ने जमकर नृत्य किया। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे का प्रतीक बन गया।
  • महिला टीम का विशेष योगदान: बीना रावत, दीपा डोडियाल और टीम की अन्य महिला सदस्यों ने जिस तरह से आयोजन का प्रबंधन किया, उसने कार्यक्रम की शोभा बढ़ा दी।

उत्सव की मुख्य विशेषताएं

  • एकता का दृश्य: जब कीर्तन मंडलियों ने ढोलक और मंजीरों की थाप पर भजन शुरू किए, तो बच्चों की मासूमियत, युवाओं का जोश और बुजुर्गों का अनुभव एक साथ मंच पर दिखाई दिया। यह दृश्य “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना को जीवंत करता है।
  • भक्ति और नृत्य: भक्ति का आनंद केवल शांत बैठने में नहीं, बल्कि उसे झूम कर व्यक्त करने में भी है। सोसाइटी के निवासियों का भजनों पर नृत्य करना यह दिखाता है कि आध्यात्मिकता हमें खुशी और ऊर्जा से भर देती है।
  • संस्कारों का संचार: बच्चों को अपने दादा-दादी और माता-पिता के साथ इस तरह के कार्यक्रमों में शामिल होते देख यह स्पष्ट होता है कि वे अपनी जड़ों और संस्कृति को करीब से महसूस कर रहे हैं।

सफलता की मुस्कान: गरमा-गरम चाय की चुस्कियों के साथ, लोगों ने गर्जिया नैना कीर्तन मंडली की सराहना की और 2026 के लिए एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं।

चाय-पकौड़े की जुगलबंदी: जब कीर्तन की समाप्ति हुई, तो सभी निवासियों ने साथ बैठकर चाय और पकौड़ों का आनंद लिया। इस साधारण से नाश्ते ने सामूहिक एकता को और मजबूत कर दिया।