गाजियाबाद, 5 अप्रैल 2026: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा आज वसुंधरा के एसजी पब्लिक स्कूल वसुंधरा स्कूल के प्रांगण में ‘शारीरिक प्रधान कार्यक्रम’ का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। चैत्र कृष्ण पक्ष तृतीया, विक्रम संवत् 2083 के पावन अवसर पर आयोजित इस उत्सव में सैकड़ों स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में अपनी अनुशासित उपस्थिति दर्ज कराई। शौर्य और अनुशासन का संगम सायं 5:00 बजे कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ, जिसमें स्वयंसेवकों ने अपनी शारीरिक दक्षता का परिचय दिया। कार्यक्रम के दौरान नियुद्ध (निहत्था युद्ध कला), दंड, और समता के हैरतअंगेज प्रदर्शन किए गए। संघ के घोष की गूँज और ऊर्जस्वित उद्घोष के बीच स्वयंसेवकों ने सामूहिक योग और आसनों का प्रदर्शन कर स्वस्थ शरीर और एकाग्र मन का संदेश दिया। इस अवसर पर प्रस्तुत एक सुमधुर एकल गीत ने उपस्थित जनसमूह में राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव जगाया।
वरिष्ठ अधिकारियों का पाथेय कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य श्रीमान रूपेश जी ने अपने संबोधन में कहा कि “शारीरिक साधना और अनुशासन ही एक सशक्त भारत की नींव है।” कार्यक्रम क अध्यक्ष श्री राजेश त्रिपाठी जी (साइबर सिक्योरिटी, NIC डायरेक्टर) ने की। उन्होंने तकनीक के युग में शारीरिक और मानसिक सुदृढ़ता के महत्व पर प्रकाश डाला।
गरिमामयी उपस्थिति* इस अवसर पर संघ के विभिन्न वरिष्ठ पदाधिकारियों का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ, जिनमें मुख्य रूप से:
श्री मदन लाल जी (माननीय भाग संघचालक)
श्री रोहित जी (महानगर प्रचारक)
श्री श्रीकांत जी (भाग कार्यवाह)
श्री सौरभ जी (भाग प्रचारक)
श्री राणा प्रताप जी (भाग शारीरिक शिक्षण प्रमुख)
श्री अरविन्द जी (भाग सह शारीरिक शिक्षण प्रमुख)
आयोजन का उद्देश्य स्वयंसेवकों ने महीनों के कठिन अभ्यास का प्रदर्शन किया। भाग प्रचारक सौरभ जी और महानगर प्रचारक रोहित जी ने स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन करते हुए समाज के हर वर्ग को राष्ट्र कार्य से जुड़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम के समापन पर सभी स्वयंसेवकों और अतिथियों के लिए जलपान की व्यवस्था की गई। इस भव्य प्रदर्शन को देखने के लिए क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक और प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे।
गाजियाबाद के नंद ग्राम में बनकर तैयार ‘उत्तरांचल भवन’ पिछले काफी समय से बंद पड़ा है। करोड़ों की लागत से बना यह भवन उत्तराखंडी प्रवासी समाज की सांस्कृतिक और सामाजिक जरूरतों के लिए था, लेकिन इसका संचालन न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। आज भारतीय पर्वतीय महासभा के पदाधिकारियों ने इस भवन को अविलंब जनता के लिए समर्पित करने हेतु एक व्यापक जन-मुहिम शुरू कर दी है।
स्तावित मांगें और बिंदु:
शीघ्र संचालन: भवन का संचालन यथाशीघ्र प्रारंभ किया जाए ।
संयुक्त संचालन समिति: एक ‘Joint Management Committee’ का गठन हो, जिसमें गाज़ियाबाद नगर निगम के अधिकारी और उत्तराखंड/पर्वतीय समाज के प्रतिनिधि समान रूप से शामिल हों ।
संस्थागत भागीदारी: संचालन प्रक्रिया में समाज की संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो ।
पारदर्शिता: बुकिंग प्रक्रिया पारदर्शी और स्पष्ट लिखित नीति के तहत हो ।
प्राथमिकता: उत्तराखंड समाज के सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जाए ।
निजीकरण का विरोध: भवन को किसी भी निजी या व्यावसायिक संस्था को हस्तांतरित न किया जाए ।
न्यायसंगत किराया: किराए की दरें सार्वजनिक की जाएं और वे तर्कसंगत हों ।
समयबद्ध योजना: 30 दिन के भीतर समिति का गठन और 60 दिन के भीतर संचालन शुरू करने की कार्ययोजना बने ।
“जब तक उत्तरांचल भवन जनता का नहीं हो जाता, महासभा का संघर्ष जारी रहेगा।”
सभी प्रवासियों से अनुरोध है कि इस मुहिम से जुड़ें और अपनी आवाज बुलंद करें। साझा करें ताकि प्रशासन तक हमारी गूँज पहुँचे!
वैशाली गाजियाबाद : मानवता और संगठन की शक्ति तब और अधिक निखर कर आती है जब कोई अपना संकट में हो। कुछ ऐसा ही उदाहरण पेश किया है ‘उत्तराखण्ड धरोहर संरक्षण समिति (पंजी०)’ ने। समिति के एक सक्रिय सदस्य , जो वर्तमान में एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, की मदद के लिए पूरी समिति एक परिवार की तरह खड़ी हो गई है।
संकट की घड़ी में ‘सेवा परमो धर्म:’ का संकल्प
सक्रिय सदस्य की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति और कमजोर आर्थिक स्थिति की जानकारी मिलते ही समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने बिना समय गंवाए आर्थिक सहायता का बीड़ा उठाया। ‘सेवा परमो धर्म:’ के अपने मूल मंत्र को ध्येय मानकर, समिति के सदस्यों ने स्वेच्छा से योगदान दिया, जिससे एक महत्वपूर्ण धनराशि एकत्रित हुई।
₹50,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की गई
समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने सक्रिय सदस्य के निवास पर जाकर उनसे और उनके परिवार से मुलाकात की। इस दौरान उपचार हेतु ₹50,000 (पचास हजार रुपए) का चेक उन्हें सौंपा गया। समिति के इस प्रयास से न केवल परिवार को आर्थिक संबल मिला है, बल्कि इस कठिन समय में उनका मानसिक मनोबल भी बढ़ा है।
“यह सहायता केवल एक धनराशि नहीं है, बल्कि हमारे संगठन की एकता और एक-दूसरे के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है। हम ईश्वर से शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हैं।” — समिति पदाधिकारी
समिति ने जताया आभार
उत्तराखण्ड धरोहर संरक्षण समिति ने अपने सभी सदस्यों का कोटि-कोटि आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने इस संवेदनशील परिस्थिति में उदारता दिखाते हुए अपना योगदान दिया। समिति ने आशा व्यक्त की है कि भविष्य में भी समाज और संगठन के हित के लिए सभी सदस्य इसी प्रकार कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करते रहेंगे।
श्रीनगर (उत्तराखंड) से दिल्ली की सड़कों पर आज कुछ बहनें पैदल चल रही हैं। उनके पैरों में छाले हैं, लेकिन आंखों में ‘न्याय’ की चमक है। Saraswati Devi जी के नेतृत्व में ये बहनें LUCC घोटाले के खिलाफ अपनी आवाज राष्ट्रपति जी तक पहुँचाने के लिए निकली हैं। श्रीनगर से दिल्ली की यह 350 किलोमीटर की पदयात्रा उन 1.5 लाख निवेशकों का दर्द बयां कर रही है, जिनकी गाढ़ी कमाई पर डाका डाला गया है। MDUPS (महानगर दिल्ली उत्तराखंड प्रवासी संगठन) और पूरी टीम इन बहनों के लिए इस कठिन समय में ‘लाठी’ का काम कर रही है। जब व्यवस्था सो जाती है, तब सड़क पर उतरा हुआ जन-आंदोलन ही उसे जगाने का काम करता है .LUCC चिट फंड घोटाला केवल पैसों की ठगी नहीं है, बल्कि पहाड़ के उस ‘भरोसे’ का कत्ल है जो एक-एक रुपया जोड़कर अपने भविष्य के लिए रखा गया था। श्रीनगर से दिल्ली तक का यह पैदल रास्ता कांटों भरा है, लेकिन MDUPS के साथ ने इसे हौसले की उड़ान बना दिया है। पहाड़ की बेटियों का हुंकार 350 KM पैदल चलकर दिल्ली पहुंचीं सरस्वती देवी, कमल ध्यानी और MDUPS बने सुरक्षा कवच। LUCC ठगी के खिलाफ आर-पार की लड़ाई: राष्ट्रपति से गुहार लगाने आ रही बहनों का मुजफ्फरनगर से दिल्ली तक MDUPS ने किया भव्य स्वागत। मोदीनगर और गाजियाबाद की टीम द्वारा खाने-पीने और ठहरने की व्यवस्था करना यह बताता है कि पहाड़ का दर्द, का दर्द केवल पहाड़ी ही समझ सकता है।अपनों से दूर, न्याय की इस लड़ाई में त्यौहार मनाना एक परिवार होने का सबसे बड़ा सबूत है। कमल ध्यानी जी, लखी राम डिमरी जी, यतींद्र सिंह सजवाण, कुलदीप जदली, बिंजोला जी, राहुल शर्मा, रेखा भट्ट, विकास ढौंडियाल और अन्नू नेगी—ने ‘अपनत्व’ दिखाया है, उसने यह साबित कर दिया कि उत्तराखंडी समाज जब ठान लेता है, तो दिल्ली की दूरियां छोटी पड़ जाती हैं।
लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC) दिल्ली-NCR और उत्तर प्रदेश में सक्रिय एक वित्तीय संस्था थी, जिस पर उच्च रिटर्न का लालच देकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। अनियमितताओं और वित्तीय रिकॉर्ड न देने के कारण, केंद्रीय रजिस्ट्रार ने मार्च 2025 में इसके परिसमापन (बंद करने) और CBI जांच के आदेश दिए हैं।
घोटाला और स्थिति: इस संस्था ने सदस्यों से सोना, तेल और अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाओं में निवेश के नाम पर धन इकट्ठा किया और बाद में बंद हो गई। इसके कारण जमाकर्ताओं के 100 करोड़ रुपये से अधिक फंस गए हैं।
परिसमापन प्रक्रिया: बार-बार नोटिस देने और वित्तीय रिकॉर्ड जमा न करने पर केंद्रीय रजिस्ट्रार ने 27 जनवरी 2025 को इसके समापन के आदेश दिए और परिसमापक नियुक्त कर दिया है।
CBI जांच: उत्तराखंड पुलिस की जांच के बाद इस मामले में सीबीआई (CBI) जांच के आदेश दिए गए हैं।
मुख्य लोग: इस घोटाले के मास्टरमाइंड के रूप में समीर अग्रवाल (CMD) और अन्य के नाम सामने आए हैं।
प्रभावित क्षेत्र: यह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और दिल्ली में काम कर रही थी
500 करोड़ के LUCC घोटाले में CBI ने 46 आरोपियों के खिलाफ दर्ज किया मुकदमा, 2 अभिनेताओं के नाम भी शामिल
एलयूसीसी (लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसायटी) के 500 करोड़ के घोटाले में सीबीआई/एसीबी देहरादून ने 46 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है. हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने मुकदमा दर्ज किया है. सोसायटी के सदस्यों के खिलाफ प्रदेश के देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल, चमोली, टिहरी, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, बागेश्वर और नैनीताल जिले में 18 मुकदमे दर्ज हैं. घोटाले में एक जून 2024 को तृप्ति नेगी की ओर से कोतवाली कोटद्वार, जिला पौड़ी गढ़वाल में दी लिखित शिकायत के आधार पहला मुकदमा दर्ज किया गया था.
कई महिलाएं गुजर रही थीं तनाव से
हर इंसान अपनी मेहनत से जमा की गई पूंजी को बचाकर मुनाफा कमाने की उम्मीद रखता है. लेकिन यदि कोई व्यक्ति सालों तक पैसा जमा कर चिटफंड में निवेश करे और घोटाला होने पर उसकी मेहनत की कमाई डूब जाए, तो दर्द और परेशानियां स्वाभाविक हैं. ऐसी ही पीड़ा से हजारों लोग गुजर रहे हैं. सबसे अधिक परेशानी उन लोगों की है जिन्होंने लाखों रुपए देकर मेंबरशिप ली और फिर एजेंट बनकर अपने नीचे कई लोगों को जोड़ लिया. न सिर्फ उनका पैसा डूबा, बल्कि जिन लोगों को उन्होंने जोड़ा था, वे भी अब उन्हीं से अपना पैसा मांग रहे हैं.
राष्ट्रपति जी हैं उम्मीद
बल्कि उत्तराखंड की उन हजारों माताओं-बहनों के अटूट विश्वास की गूँज है, जिन्होंने अपना सब कुछ इस घोटाले में खो दिया है। जब नीचे की सारी व्यवस्थाएं और रसूखदार लोग आंखें मूंद लेते हैं, तब देश का सर्वोच्च पद ही ‘अंतिम आशा’ की किरण होता है।
संपत्तियों की तत्काल कुर्की: घोटालेबाजों की बेनामी संपत्तियों को बेचकर सबसे पहले इन बहनों और गरीब निवेशकों का मूलधन लौटाया जाए।
सरकारी जवाबदेही: राज्य और केंद्र की एजेंसियां यह बताएं कि इतने वर्षों तक यह फर्जीवाड़ा चलता रहा और किसी ने इसे रोका क्यों नहीं?
सुरक्षा और न्याय: जो लोग इस घोटाले के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, उन्हें सुरक्षा दी जाए और आरोपियों को विदेश से लाकर सजा दी जाए।
उत्तराखंड धरोहर संरक्षण समिति द्वारा आज एक भव्य ‘होली मिलन समारोह’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में रंगों, उत्साह और उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति का सुंदर संगम देखने को मिला। वैशाली सेक्टर पांच में उत्तराखंड धरोहर संरक्षण समिति द्वारा आयोजित होली मिलन उत्सव में कलाकारों ने पारम्परिक उत्तराखंडी होली की झटा बिखेर दी. कार्यक्रम में पारम्परिक नृत्य झोड़ा, खड़ी होली, बैठकी होली ने दर्शकों का मन मोह लिया. उत्तराखंड की रंगबिरंगी पारम्परिक वेशभूषा के रंग समारोह की शोभा बढ़ा रहे थे. पहाड़ी बाध्य यंत्रों मशकबीन, रणसिंघा, ढोल दमाऊ की मधुर युगलबंदी के साथ होलीयारों शोभायात्रा निकाली जिसका लोगों भव्य स्वागत किया. लोक गायक पूर्ण पांडे और शशि पांडे ने रंगारंग प्रस्तुतियों से दर्शकों की वाही वाही लूटी. समिति के अध्यक्ष मदन सिंह बिष्ट और महासचिव सविता गोसाईं ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।
समारोह का मुख्य आकर्षण पारंपरिक बैठकी होली और खड़ी होली रही, जहाँ कलाकारों ने कुमाऊँनी और गढ़वाली लोक गीतों के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। उत्तराखंडी समाज को अपनी जड़ों से जोड़ना और विलुप्त हो रही सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण करना है। झांकियों के साथ-साथ जब ढोल-दमाऊ और हुड़के की थाप गूँजी, तो पूरा वातावरण ‘उत्तराखंडी रंग’ में सराबोर हो गया।
शिवाजी नगर, वैशाली में विराट हिंदू सम्मेलन छठा और अंतिम भव्य कार्यक्रमरामप्रस्थ ग्रीन्स, सेक्टर-7, वैशाली में 22 फरवरी को आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में समाज के हर वर्ग की अधिकतम भागीदारी रही। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में विशाल हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में सज्जन शक्ति को संगठित कर समाज को सकारात्मक दिशा देने का आवाहन किया गया। विराट हिंदू सम्मेलन के अंतर्गत निकाली जाने वाली कलश यात्रा भव्य यात्रा में सैकड़ों-हजारों महिलाओं द्वारा पारंपरिक पोशाक में सिर पर कलश रखकर भाग लिया जाता है, जिसमें अक्सर ‘जय श्री राम’ के जयकारों के साथ धर्म ध्वजाएं लहराई गयी.
इस समापन समारोह की गरिमा बढ़ाने के लिए विश्व प्रसिद्ध सनातनी संत, समाज सुधारक एवं आध्यात्मिक गुरु स्वामी दीपांकर जी महाराज मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। स्वामी दीपांकर महाराज ने हिंदू समाज से जातिगत भेदभाव त्याग कर एकजुट होने और 2026 में जातिवाद को समाप्त करने का आह्वान किया स्वामी जी का मार्गदर्शन इस क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगा।स्वामी दीपंकर जी महाराज ने अपने संबोधन में बांग्लादेश की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां हिंदुओं की हत्याओं के दौरान किसी की जाति नहीं पूछी गई, सभी को केवल उनके धर्म के आधार पर निशाना बनाया गया। उन्होंने चेताया कि यदि हिंदू समाज आपसी भेदभाव में बंटा रहा, तो इसके दुष्परिणाम और गंभीर हो सकते हैं। उनके इस संदेश ने सम्मेलन में उपस्थित जनसमूह को गंभीर चिंतन के लिए प्रेरित किया।उन्होंने महिलाओं से भी समाज को एकजुट करने की मुहिम में आगे आने की अपील की। स्वामी दीपांकर ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में शोभायात्राओं और धार्मिक आयोजनों पर हो रही घटनाएं समाज के लिए चेतावनी हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिंदू समाज को एक मंच पर आना ही होगा।
एक युवा को खोने का दुख कभी कम नहीं हो सकता, लेकिन जब पूरा समाज और नेतृत्व ढाल बनकर खड़ा हो जाए, तो पीड़ित परिवार को संघर्ष करने की शक्ति जरूर मिलती है। कमल ध्यानी जी के दुखद निधन के बाद जिस तरह से महानगर दिल्ली उत्तराखंड प्रवासी संगठन (MDUPS) और सांसद अनिल बलूनी जी ने मिलकर प्रयास किए, वह समाज के प्रति संवेदनशीलता का एक बड़ा उदाहरण है .एक युवा “पहाड़ के लाल” को खोना अपूरणीय क्षति है, लेकिन परिवार को इस कठिन समय में आर्थिक सुरक्षा और नौकरी का संबल मिलना न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम है
5 फरवरी को दिल्ली के जनकपुरी क्षेत्र में दिल्ली जल बोर्ड और ठेकेदार की घोर लापरवाही के कारण ‘पहाड़ के लाल’ कमल ध्यानी (25 वर्ष) का असमय निधन न केवल एक परिवार की क्षति थी, बल्कि पूरे प्रवासी उत्तराखंडी समाज के लिए एक गहरा आघात था।इस अन्याय के खिलाफ महानगर दिल्ली उत्तराखंड प्रवासी संगठन (MDUPS) ने कड़ा रुख अपनाया। 15 फरवरी को हादसे वाली जगह पर किए गए प्रचंड विरोध प्रदर्शन ने सोई हुई व्यवस्था को जगाने का काम किया। इस प्रदर्शन ने दिल्ली सरकार और जल बोर्ड की जवाबदेही तय करने के लिए समाज में एक व्यापक चेतना पैदा की। लगातार जारी संघर्ष के बीच MDUPS के प्रतिनिधिमंडल ने गढ़वाल सांसद और भाजपा के मुख्य प्रवक्ता श्री अनिल बलूनी जी से मुलाकात कर पीड़ित परिवार की व्यथा साझा की।बलूनी जी ने एक ‘सच्चे जननेता’ की भूमिका निभाते हुए इस विषय को अत्यंत गंभीरता से लिया। परिणाम स्वरूप:
त्वरित कार्यवाही: मुलाकात के मात्र 48 घंटों के भीतर पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी का वचन पूरा हुआ।
न्याय की जीत: शब्द नहीं, कर्म बोलता है पीड़ित परिवार को संबल: अनिल बलूनी जी के हस्तक्षेप के मात्र 48 घंटों के भीतर परिवार को आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी का वचन पूरा हुआ। जननेता की भूमिका: एक सच्चे जननेता की पहचान उनके वादों और उनके क्रियान्वयन से होती है। बलूनी जी ने मुख्यमंत्री के साथ समन्वय कर इसे हकीकत बनाया। यह जीत संगठन की शक्ति और हमारे प्रवासियों की एकजुटता का प्रमाण है। हम दिल्ली जल बोर्ड की लापरवाही को कभी नहीं भूलेंगे, लेकिन हमें संतोष है कि कमल ध्यानी के परिवार को इस कठिन समय में आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा का संबल मिला है।”
शिवाजी नगर, वैशाली में चल रही आध्यात्मिक और सामाजिक जागरण की श्रृंखला अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँच गई है। इस श्रृंखला का छठा और अंतिम भव्य कार्यक्रम आगामी रामप्रस्थ ग्रीन्स, सेक्टर-7, वैशाली में 22 फरवरी को आयोजित होने जा रहा है। इस कार्यक्रम को सफल बनाने और समाज के हर वर्ग की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए व्यापक स्तर पर चर्चा की गई है। हिंदू समाज को संगठित करने, उसमें स्वाभिमान जगाने, और समरसता बढ़ाने के प्रयासों के तहत, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की महत्वपूर्ण पहल “विराट हिंदू सम्मेलन” की तैयारी जोरो से शुरू हुई। रामप्रस्थ ग्रीन्स, सेक्टर-7, वैशाली में 22 फरवरी को होने वाले इस सम्मेलन के आयोजन के लिए कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई।
मुख्य वक्ता एवं अतिथि
इस समापन समारोह की गरिमा बढ़ाने के लिए विश्व प्रसिद्ध सनातनी संत, समाज सुधारक एवं आध्यात्मिक गुरु स्वामी दीपांकर जी महाराज मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहेंगे। अपनी ‘भिक्षाटन’ यात्रा के माध्यम से समाज को एकजुट करने वाले स्वामी जी का मार्गदर्शन इस क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
साथ ही, वैचारिक प्रखरता प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ अधिकारी भी मंच की शोभा बढ़ाएंगे:
श्रीमान देवेंद्र जी: विभाग कार्यवाह, गाजियाबाद विभाग (वक्ता)।
श्रीमान अतुल जी: विभाग प्रचारक, गाजियाबाद विभाग (मुख्य वक्ता)।
इस बैठक में नव-नियुक्त अध्यक्ष, सचिव एवं पूरी कार्यकारिणी टीम के साथ-साथ क्षेत्र के स्थानीय पार्षद और समाज के प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। बैठक के दौरान समाज के प्रत्येक वर्ग की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने और कार्यक्रम को भव्य रूप देने हेतु विस्तृत रणनीति तैयार की गई।
वैशाली (गाजियाबाद) स्थित उत्तराखंड कुमाऊं समाज सेवा समिति ने एक बार फिर सामाजिक दायित्व की मिसाल पेश की है। समिति ने ब्रेन इन्फेक्शन से जूझ रहे 9 वर्षीय बालक चिराग के इलाज के लिए ₹51,000 की आर्थिक सहायता राशि प्रदान कर परिवार को संबल दिया है।
आईसीयू में जीवन की जंग लड़ रहा है चिराग
मूल रूप से अल्मोड़ा (खजुरानी, चौखुटिया) के निवासी चिराग का इलाज फिलहाल दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के आईसीयू में चल रहा है। लंबी बीमारी और भारी मेडिकल खर्च के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति डगमगा गई थी और उनकी सारी जमा-पूंजी समाप्त हो चुकी थी।
संस्था के अध्यक्ष हरीश साह ने बताया कि समिति के सह-अध्यक्ष लक्ष्मण बिष्ट के माध्यम से चिराग की स्थिति की जानकारी मिली थी। जैसे ही यह सूचना समिति के समूह में साझा की गई, सदस्यों ने अपनी सेवा भावना का परिचय दिया। मात्र एक दिन के भीतर छोटी-छोटी राशियों के सहयोग से ₹51,000 का कोष एकत्रित हो गया, जिसे चेक के माध्यम से परिवार को सौंप दिया गया। संस्था का इतिहास गवाह है कि जब भी समाज के किसी व्यक्ति पर संकट आया है, समिति के सदस्यों ने एकजुट होकर मिसाल पेश की है। अध्यक्ष हरीश साह जी एवं समस्त सदस्यों के इस सेवा भाव को नमन।
देशकी राजधानी दिल्ली के जनकपुरी के खुले गड्ढे में हुई कमल ध्यानी की मौत ने लापरवाही और संवेदनहीनता की खौफनाक कहानी उजागर कर दी है. 25 साल का युवक रात में अपने घर लौट रहा था. तभी उसकी बाइक दिल्ली जल बोर्ड के 4.5 मीटर गहरे गड्ढे में जा गिरी. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कमल ध्यानी करीब 8 घंटे तक उसी गड्ढे में पड़े रहे. इस दौरान कम से कम 5 लोगों को हादसे की जानकारी थी. लेकिन किसी ने पुलिस या प्रशासन को सूचना देना जरूरी नहीं समझा. यह देरी कमल की जिंदगी पर भारी पड़ गई. जनकपुरी में कमल की मौत के मामले में द्वारका जिला अदालत ने दिल्ली पुलिस को 13 फरवरी तक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। महानगर दिल्ली उत्तराखंड प्रवासी संगठन (MDUPS) के अध्यक्ष कमल ध्यानी ने बुधवार को घटनास्थल का औचक निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।
जनकपुरी स्थित सरदार जोगिंदर सिंह मार्ग पर दिल्ली जल बोर्ड द्वारा खोदे गए मौत के गड्ढे में गिरकर हमारे पहाड़ के 25 वर्षीय युवा स्वर्गीय कमल ध्यानी की मृत्यु हो गई। यह दिल्ली जल बोर्ड और सरकार की भयावहता का नतीजा है जिसमें हमारे पहाड़ का युवा काल कवलित हो गया और सरकार की असंवेदनशीलता ,अनदेखी और दोषियों को बचाने की जो लिपापोती चल रही है उससे कमल ध्यानी का परिवार अत्यधिक निराश है संगठन के अध्यक्ष कमल ध्यानी बताया कि रविवार सुबह 11 बजे घटनास्थल पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न उत्तराखंड सामाजिक एवं वेलफेयर संगठनों के लोग एकजुट होकर शामिल होंगे। प्रदर्शन में अधिकाधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पहाड़ी बाहुल्य क्षेत्रों में बैनर-पोस्टर के माध्यम से जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।
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विराट हिंदू सम्मेलन रामप्रस्थ ग्रीन्स, सेक्टर-7, वैशाली में उमड़ा जनसैलाब ,मातृशक्ति की ऐतिहासिक भागीदारी
द्वाराहाट में होगा आत्मनिर्भर महिला सम्मेलन
महानगर दिल्ली उत्तराखण्ड प्रवासी संगठन (एमडीयूपीएस MDUPS) द्वारा आया नगर में मेडिकल कैंप का आयोजन
महानगर दिल्ली उत्तराखण्ड प्रवासी संगठन (एमडीयूपीएस MDUPS) द्वारा आया नगर में मेडिकल कैंप का आयोजन
महानगर दिल्ली उत्तराखण्ड प्रवासी संगठन (एमडीयूपीएस MDUPS) द्वारा आया नगर में मेडिकल कैंप का आयोजन