दिनांक 16 मई 2026, दिन रविवार को गाज़ियाबाद में माननीय नगर आयुक्त महोदय द्वारा उत्तराखंड समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें नंदग्राम स्थित “उत्तराखंड भवन” को पूर्ण रूप से उत्तराखंड समाज को समर्पित किए जाने की घोषणा की गई। इस अवसर पर नगर आयुक्त महोदय ने भवन के निर्माण एवं संचालन हेतु वर्षों से निरंतर प्रयासरत सामाजिक संगठनों, समाजसेवियों एवं उत्तराखंड समाज के सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। विशेष रूप से भारतीय पर्वतीय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनुपम सिंह भंडारी जी के प्रयासों एवं सक्रिय भूमिका की सराहना की गई।

ज्ञात हो कि जब भारतीय पर्वतीय महासभा की दिल्ली-NCR टीम को यह जानकारी मिली कि अनेक प्रयासों के बावजूद उत्तराखंड भवन का संचालन प्रारम्भ नहीं हो पा रहा है, तब महासभा ने इस विषय को गंभीरता से उठाया। इसके पश्चात महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनुपम सिंह भंडारी जी के नेतृत्व में केंद्रीय कार्यकारिणी द्वारा माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी को ज्ञापन सौंपकर भवन का शीघ्र संचालन प्रारम्भ कराने की मांग की गई, जिस पर मुख्यमंत्री जी ने तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

उत्तराखंड भवन के निर्माण की ऐतिहासिक घोषणा महाकौथिक के मंच से की गई थी, जिसके लिए राजेन्द्र चौहान जी एवं महाकौथिक की समस्त टीम का उत्तराखंड समाज आभार व्यक्त करता है।

इस अवसर पर श्री दिनेश लखेड़ा जी, श्री सच्चिदानंद शर्मा जी, पूर्व पार्षद श्रीमती मीना भंडारी जी, श्री बालम सिंह बिष्ट जी एवं माननीय पार्षद श्री हरिश कड़ाकोटी जी सहित सभी वरिष्ठजनों एवं समाजसेवियों के योगदान को भी विशेष रूप से सराहा गया।

साथ ही भारतीय पर्वतीय महासभा की दिल्ली-NCR शाखा से श्री अभिनव सिंह भंडारी जी, श्री भुवन चंद पांडे जी, श्री रोहित रावत जी, श्री दीपक रावत जी, श्री सतीश भारद्वाज जी, श्री अनिल वर्मा जी, श्री बी.डी. उप्रेती जी एवं श्री हेमंत जोशी जी के सहयोग एवं समर्पण की भी सराहना की गई।

महासभा द्वारा बताया गया कि सदस्यता शुल्क एवं संचालन से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण मांगों को लेकर समाज का प्रयास आगे भी निरंतर जारी रहेगा।

5 मई 2026 को दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल जैसे बड़े मंच पर उत्तराखंडी फीचर फिल्म ‘घंगतोल’ की स्क्रीनिंग हुई। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) जैसे प्रतिष्ठित स्थान पर क्षेत्रीय सिनेमा का प्रदर्शन होना हमारी संस्कृति की बढ़ती पहुंच और पहचान का प्रमाण है।

जब दिल्ली जैसे महानगरों में रहने वाला उत्तराखंडी समाज अपनी जड़ों से जुड़ी फिल्म देखने के लिए उमड़ता है, तो यह केवल मनोरंजन नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक एकजुटता का प्रतीक बन जाता है।

इस स्क्रीनिंग के कुछ खास मायने:

  • सांस्कृतिक गौरव: प्रवासी उत्तराखंडियों के लिए यह अपनी भाषा, संगीत और रीति-रिवाजों को बड़े पर्दे पर अनुभव करने का एक भावुक पल रहा होगा।
  • युवा पीढ़ी का जुड़ाव: दिल्ली जैसे शहरों में पली-बढ़ी नई पीढ़ी को अपनी ‘पौराणिक धरोहर’ और पहाड़ों की वास्तविकता को समझने का मौका मिला।
  • सिनेमाई पहचान: उत्तराखंडी सिनेमा अब केवल क्षेत्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स में अपनी जगह बनाकर वैश्विक पहचान की ओर अग्रसर है।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) में ‘घंगतोल’ फिल्म के कलाकारों से मिलने का अवसर मिला। पहाड़ की संस्कृति और रीति-रिवाजों को सहेजने की दिशा में इस तरह के प्रयास वाकई सराहनीय हैं।

आज के समय में जब आधुनिकता की दौड़ में हम अपनी जड़ों को भूलते जा रहे हैं, तब ऐसी फिल्में समाज को आईना दिखाने का काम करती हैं। ‘घंगतोल’ जैसी फिल्में न केवल हमारी पौराणिक धरोहर को पुनर्जीवित करती हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को अपनी मिट्टी से जुड़ने की प्रेरणा भी देती हैं।

पहाड़ की संस्कृति और पुरानी परंपराओं को फिर से जीवित करने का आपका संकल्प बहुत महत्वपूर्ण है। अपनी विरासत पर गर्व करना और उसे अपनी जीवनशैली में वापस लाना ही अपनी पहचान को बचाए रखने का एकमात्र तरीका है।

उम्मीद है कि यह फिल्म जन-जन तक पहुंचेगी और लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौटने के लिए प्रेरित करेगी।

पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में एक ऐतिहासिक बदलाव आया है। 4 मई 2026 को घोषित विधानसभा चुनाव परिणामों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पहली बार राज्य में पूर्ण बहुमत हासिल कर सरकार बनाने का मार्ग प्रशस्त किया है।

इस चुनाव के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • ऐतिहासिक बहुमत: भाजपा ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 206 सीटें जीतकर दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल किया है।

  • सत्तारूढ़ दल की हार: ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) का 15 साल पुराना शासन समाप्त हो गया है। TMC को इस बार केवल 81 सीटों पर संतोष करना पड़ा।

  • बड़ा उलटफेर: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके ही गढ़ भवानीपुर सीट पर भाजपा के शुभेंदु अधिकारी ने 15,105 वोटों के अंतर से हराया।

  • अन्य परिणाम: कांग्रेस और आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) को 2-2 सीटें मिलीं, जबकि माकपा (CPI-M) को केवल 1 सीट मिली।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इस जीत को “सुशासन की राजनीति की जीत” बताया और कहा कि अब बंगाल “भय से मुक्त” हो गया है। 1972 के बाद यह पहली बार होगा जब पश्चिम बंगाल में उसी दल की सरकार होगी जो केंद्र में भी सत्ता में है।

भारतीय पर्वतीय समाज के हितों एवं समग्र विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए भारतीय पर्वतीय महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से लोक भवन, लखनऊ में शिष्टाचार भेंट की । इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्रीय विकास, सांस्कृतिक संरक्षण एवं बुनियादी सुविधाओं से जुड़े अहम विषयों पर चर्चा करते हुए विभिन्न मांगों से संबंधित पत्र एवं ज्ञापन सौंपे।
प्रतिनिधिमंडल ने आगामी “पंचम वार्षिक उत्सव कार्यक्रम” में मुख्यमंत्री जी को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया । यह आयोजन पर्वतीय संस्कृति, लोक कला और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है,
उत्तर प्रदेश सरकार जिससे नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का अवसर मिलेगा। महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनुपम सिंह भंडारी ने लखनऊ – हल्द्वानी प्रस्तावित गोमती एक्सप्रेसवे के शीघ्र निर्माण हेतु आवेदन प्रस्तुत
किया । इस लगभग 300 किमी लंबे एक्सप्रेसवे से यात्रा समय में कमी आएगी और पर्यटन, व्यापार व क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी। साथ ही, नंदग्राम (गाजियाबाद) स्थित ” उत्तराखंड भवन” के संचालन एवं प्रबंधन
को लेकर भी ज्ञापन दिया गया,
जिसमें संयुक्त प्रबंधन समिति के गठन एवं पारदर्शी बुकिंग व्यवस्था की मांग रखी गई। प्रतिनिधिमंडल ने सभी प्रस्तावों को जनहित एवं पर्वतीय समाज के उत्थान से जुड़ा बताते हुए प्राथमिकता के आध र पर कार्यवाही का अनुरोध किया। इस अवसर पर पान सिंह भंडारी, दया कृष्ण डालाकोटी, दिनेश उप्रेती सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे । माननीय मुख्यमंत्री योगी जी ने सभी विषयों को गंभीरता से सुनते हुए आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया । यह भेंट पर्वतीय समाज के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे भविष्य में विकास कार्यों को नई गति मिलने की संभावना है। इस पहल से आने वाले समय में पर्वतीय समाज के बुनियादी ढांचे और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को सरकारी स्तर पर अधिक बल मिलने की उम्मीद है।

शहीद केसरी चंद जी की यह गाथा और जौनसार-बावर की यह अटूट देशभक्ति हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का उत्तराखंड के रणबांकुरों पर अटूट विश्वास इस बात का प्रमाण है कि हमारी देवभूमि ‘वीरभूमि’ भी है।

एक वीर का जीवन परिचय: केसरी चंद का जन्म 1 नवंबर 1920 को जौनसार-बावर के क्यावा गांव में हुआ था। उनकी रगों में देशभक्ति का ज्वार था, जो उन्हें द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नेताजी सुभाष चंद्र बोस की ‘आजाद हिंद फौज’ (INA) की ओर ले गया। वे ‘आजाद हिंद फौज’ के एक निष्ठावान और पराक्रमी सैनिक बने।

सर्वोच्च बलिदान: इंफाल के मोर्चे पर ब्रिटिश सेना के खिलाफ अदम्य साहस का परिचय देते हुए, वे बंदी बना लिए गए थे। ब्रिटिश हुकूमत के दमन चक्र ने उन्हें डराने का बहुत प्रयास किया, लेकिन उनके फौलादी इरादों को कोई डिगा न सका। अंततः, 3 मई 1945 को दिल्ली की ऐतिहासिक तिहाड़ जेल में उन्हें फांसी दे दी गई।

कहा जाता है कि फांसी के फंदे पर चढ़ने से पहले, उन्होंने उसे हंसते-हंसते चूमा था। उनके ये अंतिम क्षण उनकी देश के प्रति अटूट निष्ठा और बलिदान का प्रतीक हैं। मात्र 24 वर्ष की आयु में, उन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया।

मेला: वीरता और संस्कृति का महोत्सव हर साल 3 मई को जौनसार-बावर चकराता में शहीद केसरी चंद के स्मारक स्थल (रामताल) पर एक भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। यह मेला केवल एक मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह शहीद केसरी चंद की वीरता और जौनसार-बावर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जश्न है।

मेले की शुरुआत शहीद केसरी चंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देने के साथ होती है। इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से आए लाखों लोग अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण: यह मेला जौनसारी संस्कृति का एक जीवंत उदाहरण है। स्थानीय कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में हारुल, तांदी और रासो जैसे लोक नृत्य प्रस्तुत करते हैं। ये नृत्य और संगीत न केवल दर्शकों का मन मोह लेते हैं, बल्कि वे क्षेत्र की परंपराओं और लोककथाओं को भी जीवंत रखते हैं।

सामाजिक मिलन और महत्व: जौनसार-बावर क्षेत्र के हजारों लोग अपनी परंपराओं को जीवित रखने और अपने नायक को याद करने के लिए यहाँ एकत्र होते हैं। यह मेला सामाजिक मिलन का एक महत्वपूर्ण अवसर है, जहाँ लोग एक-दूसरे से मिलते हैं, अपनी खुशियाँ साझा करते हैं और अपनी संस्कृति को और मजबूत करते हैं।

यह मेला नई पीढ़ी को उत्तराखंड के वीर सपूतों के बलिदान से अवगत कराने और क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को संजोने का एक सशक्त माध्यम है। शहीद केसरी चंद का जीवन आज भी हमें प्रेरणा देता है कि हम अपने देश के प्रति निष्ठावान रहें और उसकी रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहें।

थाली में पोषण, पर खुद की झोली खाली

देश के सरकारी स्कूलों में ‘मिड-डे मील’ योजना की रीढ़ मानी जाने वाली भोजन माताएं आज एक ऐसे चौराहे पर खड़ी हैं, जहाँ उनकी 25 साल की सेवा के बदले उन्हें केवल ₹3000 प्रति माह का ‘मानदेय’ मिल रहा है। यह लेख उन महिलाओं की आवाज़ है जो हज़ारों बच्चों का पेट तो भरती हैं, लेकिन खुद की रसोई चलाने के लिए संघर्ष कर रही हैं।

1. सशक्तिकरण के दावों की जमीनी हकीकत

सरकारें मंचों से ‘महिला सशक्तिकरण’ और ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ जैसे नारों का उद्घोष करती हैं। लेकिन जब हम भोजन माताओं की आर्थिक स्थिति देखते हैं, तो यह नारे खोखले नजर आते हैं।

  • दैनिक आय: ₹3000 प्रति माह का मतलब है ₹100 प्रतिदिन।

  • तुलना: यह आय मनरेगा की मजदूरी और अकुशल श्रमिकों के न्यूनतम वेतन से भी आधी है।

2. ‘मानदेय’ के पीछे छुपा शोषण

प्रशासनिक शब्दावली में इन्हें ‘कर्मचारी’ नहीं बल्कि ‘स्वयंसेवक’ माना जाता है, इसलिए इन्हें ‘वेतन’ के बजाय ‘मानदेय’ दिया जाता है।

  • 25 साल का अनुभव: क्या ढाई दशक की निष्ठा के बाद भी कोई पदोन्नति या वेतन वृद्धि नहीं होनी चाहिए?

  • बिना छुट्टियों के काम: कई राज्यों में इन्हें साल के केवल 10 महीने का पैसा दिया जाता है, जैसे कि जून की छुट्टियों में उन्हें भूख न लगती हो।

3. काम का बोझ और सामाजिक सुरक्षा का अभाव

भोजन माता का काम सिर्फ खाना बनाना नहीं है। इसमें शामिल है:

  • राशन का प्रबंधन और सफाई।

  • भारी बर्तनों और चूल्हे के धुएं के बीच काम करना।

  • शून्य सुरक्षा: काम के दौरान दुर्घटना या बीमारी होने पर सरकार की ओर से कोई चिकित्सा सुविधा या बीमा कवर नहीं मिलता।

4. भोजन माताओं की प्रमुख मांगें

लेख के इस हिस्से में उनकी मांगों को प्रमुखता से रखें:

  1. न्यूनतम मजदूरी: कम से कम ₹15,000 से ₹18,000 प्रति माह का मानदेय।

  2. राज्य कर्मचारी का दर्जा: वर्षों की सेवा के आधार पर स्थायीकरण।

  3. पेंशन योजना: रिटायरमेंट के बाद सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आर्थिक मदद।

  4. समान कार्य, समान वेतन: अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की तरह सुविधाएं।


निष्कर्ष: अब न्याय की बारी

भोजन माताओं का सवाल सरकार के अंतर्मन पर एक चोट है। यदि राष्ट्र के भविष्य (बच्चे) को पोषण देने वाली महिलाएं खुद कुपोषण और गरीबी की शिकार होंगी, तो हम एक ‘विकसित भारत’ की कल्पना कैसे कर सकते हैं? सशक्तिकरण तब होगा जब उनके हाथों को केवल काम नहीं, बल्कि उनके श्रम का उचित मूल्य और सामाजिक सम्मान भी मिलेगा।

https://www.youtube.com/watch?v=tp7Y0Hn_fgk

गाजियाबाद, 5 अप्रैल 2026:
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा आज वसुंधरा के एसजी पब्लिक स्कूल वसुंधरा स्कूल के प्रांगण में ‘शारीरिक प्रधान कार्यक्रम’ का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। चैत्र कृष्ण पक्ष तृतीया, विक्रम संवत् 2083 के पावन अवसर पर आयोजित इस उत्सव में सैकड़ों स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में अपनी अनुशासित उपस्थिति दर्ज कराई।
शौर्य और अनुशासन का संगम सायं 5:00 बजे कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ, जिसमें स्वयंसेवकों ने अपनी शारीरिक दक्षता का परिचय दिया। कार्यक्रम के दौरान नियुद्ध (निहत्था युद्ध कला), दंड, और समता के हैरतअंगेज प्रदर्शन किए गए। संघ के घोष की गूँज और ऊर्जस्वित उद्घोष के बीच स्वयंसेवकों ने सामूहिक योग और आसनों का प्रदर्शन कर स्वस्थ शरीर और एकाग्र मन का संदेश दिया। इस अवसर पर प्रस्तुत एक सुमधुर एकल गीत ने उपस्थित जनसमूह में राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव जगाया।

वरिष्ठ अधिकारियों का पाथेय
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य श्रीमान रूपेश जी ने अपने संबोधन में कहा कि “शारीरिक साधना और अनुशासन ही एक सशक्त भारत की नींव है।” कार्यक्रम क अध्यक्ष श्री राजेश त्रिपाठी जी (साइबर सिक्योरिटी, NIC डायरेक्टर) ने की। उन्होंने तकनीक के युग में शारीरिक और मानसिक सुदृढ़ता के महत्व पर प्रकाश डाला।

  • गरिमामयी उपस्थिति*
    इस अवसर पर संघ के विभिन्न वरिष्ठ पदाधिकारियों का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ, जिनमें मुख्य रूप से:
  • श्री मदन लाल जी (माननीय भाग संघचालक)
  • श्री रोहित जी (महानगर प्रचारक)
  • श्री श्रीकांत जी (भाग कार्यवाह)
  • श्री सौरभ जी (भाग प्रचारक)
  • श्री राणा प्रताप जी (भाग शारीरिक शिक्षण प्रमुख)
  • श्री अरविन्द जी (भाग सह शारीरिक शिक्षण प्रमुख)
  • आयोजन का उद्देश्य
    स्वयंसेवकों ने महीनों के कठिन अभ्यास का प्रदर्शन किया। भाग प्रचारक सौरभ जी और महानगर प्रचारक रोहित जी ने स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन करते हुए समाज के हर वर्ग को राष्ट्र कार्य से जुड़ने का आह्वान किया।
    कार्यक्रम के समापन पर सभी स्वयंसेवकों और अतिथियों के लिए जलपान की व्यवस्था की गई। इस भव्य प्रदर्शन को देखने के लिए क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक और प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे।

गाजियाबाद के नंद ग्राम में बनकर तैयार ‘उत्तरांचल भवन’ पिछले काफी समय से बंद पड़ा है। करोड़ों की लागत से बना यह भवन उत्तराखंडी प्रवासी समाज की सांस्कृतिक और सामाजिक जरूरतों के लिए था, लेकिन इसका संचालन न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। आज भारतीय पर्वतीय महासभा के पदाधिकारियों ने इस भवन को अविलंब जनता के लिए समर्पित करने हेतु एक व्यापक जन-मुहिम शुरू कर दी है।

स्तावित मांगें और बिंदु:

  1. शीघ्र संचालन: भवन का संचालन यथाशीघ्र प्रारंभ किया जाए ।
  2. संयुक्त संचालन समिति: एक ‘Joint Management Committee’ का गठन हो, जिसमें गाज़ियाबाद नगर निगम के अधिकारी और उत्तराखंड/पर्वतीय समाज के प्रतिनिधि समान रूप से शामिल हों ।
  3. संस्थागत भागीदारी: संचालन प्रक्रिया में समाज की संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो ।
  4. पारदर्शिता: बुकिंग प्रक्रिया पारदर्शी और स्पष्ट लिखित नीति के तहत हो ।
  5. प्राथमिकता: उत्तराखंड समाज के सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जाए ।
  6. निजीकरण का विरोध: भवन को किसी भी निजी या व्यावसायिक संस्था को हस्तांतरित न किया जाए ।
  7. न्यायसंगत किराया: किराए की दरें सार्वजनिक की जाएं और वे तर्कसंगत हों ।
  8. समयबद्ध योजना: 30 दिन के भीतर समिति का गठन और 60 दिन के भीतर संचालन शुरू करने की कार्ययोजना बने ।

“जब तक उत्तरांचल भवन जनता का नहीं हो जाता, महासभा का संघर्ष जारी रहेगा।”

सभी प्रवासियों से अनुरोध है कि इस मुहिम से जुड़ें और अपनी आवाज बुलंद करें। साझा करें ताकि प्रशासन तक हमारी गूँज पहुँचे!

वैशाली गाजियाबाद : मानवता और संगठन की शक्ति तब और अधिक निखर कर आती है जब कोई अपना संकट में हो। कुछ ऐसा ही उदाहरण पेश किया है ‘उत्तराखण्ड धरोहर संरक्षण समिति (पंजी०)’ ने। समिति के एक सक्रिय सदस्य , जो वर्तमान में एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, की मदद के लिए पूरी समिति एक परिवार की तरह खड़ी हो गई है।

संकट की घड़ी में ‘सेवा परमो धर्म:’ का संकल्प

सक्रिय सदस्य की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति और कमजोर आर्थिक स्थिति की जानकारी मिलते ही समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने बिना समय गंवाए आर्थिक सहायता का बीड़ा उठाया। ‘सेवा परमो धर्म:’ के अपने मूल मंत्र को ध्येय मानकर, समिति के सदस्यों ने स्वेच्छा से योगदान दिया, जिससे एक महत्वपूर्ण धनराशि एकत्रित हुई।

₹50,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की गई

समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने सक्रिय सदस्य के निवास पर जाकर उनसे और उनके परिवार से मुलाकात की। इस दौरान उपचार हेतु ₹50,000 (पचास हजार रुपए) का चेक उन्हें सौंपा गया। समिति के इस प्रयास से न केवल परिवार को आर्थिक संबल मिला है, बल्कि इस कठिन समय में उनका मानसिक मनोबल भी बढ़ा है।

“यह सहायता केवल एक धनराशि नहीं है, बल्कि हमारे संगठन की एकता और एक-दूसरे के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है। हम ईश्वर से शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हैं।” — समिति पदाधिकारी

समिति ने जताया आभार

उत्तराखण्ड धरोहर संरक्षण समिति ने अपने सभी सदस्यों का कोटि-कोटि आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने इस संवेदनशील परिस्थिति में उदारता दिखाते हुए अपना योगदान दिया। समिति ने आशा व्यक्त की है कि भविष्य में भी समाज और संगठन के हित के लिए सभी सदस्य इसी प्रकार कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करते रहेंगे।

श्रीनगर (उत्तराखंड) से दिल्ली की सड़कों पर आज कुछ बहनें पैदल चल रही हैं। उनके पैरों में छाले हैं, लेकिन आंखों में ‘न्याय’ की चमक है। Saraswati Devi जी के नेतृत्व में ये बहनें LUCC घोटाले के खिलाफ अपनी आवाज राष्ट्रपति जी तक पहुँचाने के लिए निकली हैं। श्रीनगर से दिल्ली की यह 350 किलोमीटर की पदयात्रा उन 1.5 लाख निवेशकों का दर्द बयां कर रही है, जिनकी गाढ़ी कमाई पर डाका डाला गया है। MDUPS (महानगर दिल्ली उत्तराखंड प्रवासी संगठन) और पूरी टीम इन बहनों के लिए इस कठिन समय में ‘लाठी’ का काम कर रही है। जब व्यवस्था सो जाती है, तब सड़क पर उतरा हुआ जन-आंदोलन ही उसे जगाने का काम करता है .LUCC चिट फंड घोटाला केवल पैसों की ठगी नहीं है, बल्कि पहाड़ के उस ‘भरोसे’ का कत्ल है जो एक-एक रुपया जोड़कर अपने भविष्य के लिए रखा गया था। श्रीनगर से दिल्ली तक का यह पैदल रास्ता कांटों भरा है, लेकिन MDUPS के साथ ने इसे हौसले की उड़ान बना दिया है। पहाड़ की बेटियों का हुंकार 350 KM पैदल चलकर दिल्ली पहुंचीं सरस्वती देवी, कमल ध्यानी और MDUPS बने सुरक्षा कवच। LUCC ठगी के खिलाफ आर-पार की लड़ाई: राष्ट्रपति से गुहार लगाने आ रही बहनों का मुजफ्फरनगर से दिल्ली तक MDUPS ने किया भव्य स्वागत। मोदीनगर और गाजियाबाद की टीम द्वारा खाने-पीने और ठहरने की व्यवस्था करना यह बताता है कि पहाड़ का दर्द, का दर्द केवल पहाड़ी ही समझ सकता है।अपनों से दूर, न्याय की इस लड़ाई में त्यौहार मनाना एक परिवार होने का सबसे बड़ा सबूत है। कमल ध्यानी जी, लखी राम डिमरी जी, यतींद्र सिंह सजवाण, कुलदीप जदली, बिंजोला जी, राहुल शर्मा, रेखा भट्ट, विकास ढौंडियाल और अन्नू नेगी—ने ‘अपनत्व’ दिखाया है, उसने यह साबित कर दिया कि उत्तराखंडी समाज जब ठान लेता है, तो दिल्ली की दूरियां छोटी पड़ जाती हैं।

लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC)

लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC) दिल्ली-NCR और उत्तर प्रदेश में सक्रिय एक वित्तीय संस्था थी, जिस पर उच्च रिटर्न का लालच देकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। अनियमितताओं और वित्तीय रिकॉर्ड न देने के कारण, केंद्रीय रजिस्ट्रार ने मार्च 2025 में इसके परिसमापन (बंद करने) और CBI जांच के आदेश दिए हैं।

  • घोटाला और स्थिति: इस संस्था ने सदस्यों से सोना, तेल और अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाओं में निवेश के नाम पर धन इकट्ठा किया और बाद में बंद हो गई। इसके कारण जमाकर्ताओं के 100 करोड़ रुपये से अधिक फंस गए हैं।
  • परिसमापन प्रक्रिया: बार-बार नोटिस देने और वित्तीय रिकॉर्ड जमा न करने पर केंद्रीय रजिस्ट्रार ने 27 जनवरी 2025 को इसके समापन के आदेश दिए और परिसमापक नियुक्त कर दिया है।
  • CBI जांच: उत्तराखंड पुलिस की जांच के बाद इस मामले में सीबीआई (CBI) जांच के आदेश दिए गए हैं।
  • मुख्य लोग: इस घोटाले के मास्टरमाइंड के रूप में समीर अग्रवाल (CMD) और अन्य के नाम सामने आए हैं।
  • प्रभावित क्षेत्र: यह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और दिल्ली में काम कर रही थी

500 करोड़ के LUCC घोटाले में CBI ने 46 आरोपियों के खिलाफ दर्ज किया मुकदमा, 2 अभिनेताओं के नाम भी शामिल

एलयूसीसी (लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसायटी) के 500 करोड़ के घोटाले में सीबीआई/एसीबी देहरादून ने 46 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है. हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने मुकदमा दर्ज किया है. सोसायटी के सदस्यों के खिलाफ प्रदेश के देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल, चमोली, टिहरी, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, बागेश्वर और नैनीताल जिले में 18 मुकदमे दर्ज हैं. घोटाले में एक जून 2024 को तृप्ति नेगी की ओर से कोतवाली कोटद्वार, जिला पौड़ी गढ़वाल में दी लिखित शिकायत के आधार पहला मुकदमा दर्ज किया गया था.

कई महिलाएं गुजर रही थीं तनाव से

हर इंसान अपनी मेहनत से जमा की गई पूंजी को बचाकर मुनाफा कमाने की उम्मीद रखता है. लेकिन यदि कोई व्यक्ति सालों तक पैसा जमा कर चिटफंड में निवेश करे और घोटाला होने पर उसकी मेहनत की कमाई डूब जाए, तो दर्द और परेशानियां स्वाभाविक हैं. ऐसी ही पीड़ा से हजारों लोग गुजर रहे हैं. सबसे अधिक परेशानी उन लोगों की है जिन्होंने लाखों रुपए देकर मेंबरशिप ली और फिर एजेंट बनकर अपने नीचे कई लोगों को जोड़ लिया. न सिर्फ उनका पैसा डूबा, बल्कि जिन लोगों को उन्होंने जोड़ा था, वे भी अब उन्हीं से अपना पैसा मांग रहे हैं.

राष्ट्रपति जी हैं उम्मीद

बल्कि उत्तराखंड की उन हजारों माताओं-बहनों के अटूट विश्वास की गूँज है, जिन्होंने अपना सब कुछ इस घोटाले में खो दिया है। जब नीचे की सारी व्यवस्थाएं और रसूखदार लोग आंखें मूंद लेते हैं, तब देश का सर्वोच्च पद ही ‘अंतिम आशा’ की किरण होता है।

संपत्तियों की तत्काल कुर्की: घोटालेबाजों की बेनामी संपत्तियों को बेचकर सबसे पहले इन बहनों और गरीब निवेशकों का मूलधन लौटाया जाए।

सरकारी जवाबदेही: राज्य और केंद्र की एजेंसियां यह बताएं कि इतने वर्षों तक यह फर्जीवाड़ा चलता रहा और किसी ने इसे रोका क्यों नहीं?

सुरक्षा और न्याय: जो लोग इस घोटाले के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, उन्हें सुरक्षा दी जाए और आरोपियों को विदेश से लाकर सजा दी जाए।