गाजियाबाद के नंद ग्राम में बनकर तैयार 'उत्तरांचल भवन' पिछले काफी समय से बंद पड़ा है। करोड़ों की लागत से बना यह भवन उत्तराखंडी प्रवासी समाज की सांस्कृतिक और सामाजिक जरूरतों के लिए था, लेकिन इसका संचालन न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। आज भारतीय पर्वतीय महासभा के पदाधिकारियों ने इस भवन को अविलंब जनता के लिए समर्पित करने हेतु एक व्यापक जन-मुहिम शुरू कर दी है।
स्तावित मांगें और बिंदु:
"जब तक उत्तरांचल भवन जनता का नहीं हो जाता, महासभा का संघर्ष जारी रहेगा।"
सभी प्रवासियों से अनुरोध है कि इस मुहिम से जुड़ें और अपनी आवाज बुलंद करें। साझा करें ताकि प्रशासन तक हमारी गूँज पहुँचे!
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