पर्यावरण संरक्षण के प्रति उत्तराखंडी कितने सजग हैं, इसका उदाहरण अल्मोड़ा के शकंर सिंह बिष्ट हैं। महज 22 साल की उम्र में शंकर, चौखुटिया से गैरसैंण-देहरादून होते हुए दिल्ली की पदयात्रा उनका मकसद है उत्तराखंड के पर्यावरणीय संसाधनों की रक्षा का संदेश जन जन तक पहुंचाना।
चौखुटिया : पर्यावरण सुरक्षा एवं वनों को आग से बचाने का संदेश जनजन तक पहुंचाने को लेकर सीमांत गांव चनौला-खजुरानी से पदयात्रा पर निकले पर्यावरणप्रेमी शंकर सिंह बिष्ट दिल्ली पहुंच गए हैं। वेस्ट विनोद नगर में पहाड़ी समाज के लोगों ने फूल मालाओं से उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। शंकर ने बताया कि उनकी 650 किमी की पैदल यात्रा 17 दिन में पूर्ण हुई। इसमें उन्होंने स्थान-स्थान पर आमजन को पर्यावरण सुरक्षा के लिए जंगलों को आग से बचाने का संदेश दिया। बताया कि जब जंगल सुरक्षित रहेंगे तो धरती पर जीवन सुरक्षित रहेगा।
यहां बता दें कि पर्यावरणप्रेमी शंकर सिंह बिष्ट ने एक अन्य साथी प्रमोद बिष्ट को साथ लेकर यह यात्रा एक अप्रैल को विकास खंड के चनौला (खजुरानी) गांव से शुरू की। जो चौखुटिया, गैरसैंण, कर्णप्रयाग, श्रीनगर, देवप्रयाग, ऋषिकेश, देहरादून, रुड़की, मेरठ होते हुए रविवार देर सायं दिल्ली पहुंची। जहां वेस्ट विनोद नगर में पहाड़ी समाज के लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया। शंकर सिंह बिष्ट ने पदयात्रा के अपने अनुभव बताए। कहा कि पर्यावरण सुरक्षा व संरक्षण को जनसहभागिता जरूरी है।



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