इस सम्मेलन में मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर श्री वेदमुती गिरि जी महाराज पंचायत अखाड़ा श्री निरंजनी ने कहा कि हिंदू बटेगा तो देश कटेगा, हिंदू जाति में नहीं बंटें, एक रहोगे तो नेक रहोगे, नेक रहोगे तो सेफ रहोगे। वहीं, विशिष्ट अतिथि महामंडलेश्वर स्वामी नंदराज जी महाराज पंचायती आशाराम जी निरंजन ने कहा कि परिवार के सनातन संस्कारों से दृढ़ निश्चय बनेंगे तो एक संगठित समाज और संगठित राष्ट्र का निर्माण हो सकता है।
सम्मेलन में मुख्य वक्ता श्री विनय जी प्रांत सह वयस्था प्रमुख मेरट प्रांत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कहा कि संघ का शताब्दी यानी 100 वर्षों की साधना का सार यह है कि संघ ने केवल एक संगठन नहीं बनाया, बल्कि समाज का चरित्र गढ़ने का प्रयास किया है। श्री चंद्रभानु जी बौद्धिक शिक्षण प्रमुख पंच परिवर्तन पर आधारित रहा।
इस सम्मेलन में बचों द्वारा भारतीय सांस्कृतिक कार्यक्रम किए गए जिसमे नारायणी वीर रस प्रदर्शन, बाल सिंह गर्जन प्रस्तुति, युवा शौर्य प्रदर्शन, वेद संगीत उद्बोधन का प्रदर्शन किया गया। सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ, भारत माता आरती, भंडारा प्रसाद का वितरण कर समापन किया गया।




