श्रीनगर (उत्तराखंड) से दिल्ली की सड़कों पर आज कुछ बहनें पैदल चल रही हैं। उनके पैरों में छाले हैं, लेकिन आंखों में ‘न्याय’ की चमक है। Saraswati Devi जी के नेतृत्व में ये बहनें LUCC घोटाले के खिलाफ अपनी आवाज राष्ट्रपति जी तक पहुँचाने के लिए निकली हैं। श्रीनगर से दिल्ली की यह 350 किलोमीटर की पदयात्रा उन 1.5 लाख निवेशकों का दर्द बयां कर रही है, जिनकी गाढ़ी कमाई पर डाका डाला गया है। MDUPS (महानगर दिल्ली उत्तराखंड प्रवासी संगठन) और पूरी टीम इन बहनों के लिए इस कठिन समय में ‘लाठी’ का काम कर रही है। जब व्यवस्था सो जाती है, तब सड़क पर उतरा हुआ जन-आंदोलन ही उसे जगाने का काम करता है .LUCC चिट फंड घोटाला केवल पैसों की ठगी नहीं है, बल्कि पहाड़ के उस ‘भरोसे’ का कत्ल है जो एक-एक रुपया जोड़कर अपने भविष्य के लिए रखा गया था। श्रीनगर से दिल्ली तक का यह पैदल रास्ता कांटों भरा है, लेकिन MDUPS के साथ ने इसे हौसले की उड़ान बना दिया है। पहाड़ की बेटियों का हुंकार 350 KM पैदल चलकर दिल्ली पहुंचीं सरस्वती देवी, कमल ध्यानी और MDUPS बने सुरक्षा कवच। LUCC ठगी के खिलाफ आर-पार की लड़ाई: राष्ट्रपति से गुहार लगाने आ रही बहनों का मुजफ्फरनगर से दिल्ली तक MDUPS ने किया भव्य स्वागत। मोदीनगर और गाजियाबाद की टीम द्वारा खाने-पीने और ठहरने की व्यवस्था करना यह बताता है कि पहाड़ का दर्द, का दर्द केवल पहाड़ी ही समझ सकता है।अपनों से दूर, न्याय की इस लड़ाई में त्यौहार मनाना एक परिवार होने का सबसे बड़ा सबूत है। कमल ध्यानी जी, लखी राम डिमरी जी, यतींद्र सिंह सजवाण, कुलदीप जदली, बिंजोला जी, राहुल शर्मा, रेखा भट्ट, विकास ढौंडियाल और अन्नू नेगी—ने ‘अपनत्व’ दिखाया है, उसने यह साबित कर दिया कि उत्तराखंडी समाज जब ठान लेता है, तो दिल्ली की दूरियां छोटी पड़ जाती हैं।

लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC)
लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC) दिल्ली-NCR और उत्तर प्रदेश में सक्रिय एक वित्तीय संस्था थी, जिस पर उच्च रिटर्न का लालच देकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। अनियमितताओं और वित्तीय रिकॉर्ड न देने के कारण, केंद्रीय रजिस्ट्रार ने मार्च 2025 में इसके परिसमापन (बंद करने) और CBI जांच के आदेश दिए हैं।
- घोटाला और स्थिति: इस संस्था ने सदस्यों से सोना, तेल और अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाओं में निवेश के नाम पर धन इकट्ठा किया और बाद में बंद हो गई। इसके कारण जमाकर्ताओं के 100 करोड़ रुपये से अधिक फंस गए हैं।
- परिसमापन प्रक्रिया: बार-बार नोटिस देने और वित्तीय रिकॉर्ड जमा न करने पर केंद्रीय रजिस्ट्रार ने 27 जनवरी 2025 को इसके समापन के आदेश दिए और परिसमापक नियुक्त कर दिया है।
- CBI जांच: उत्तराखंड पुलिस की जांच के बाद इस मामले में सीबीआई (CBI) जांच के आदेश दिए गए हैं।
- मुख्य लोग: इस घोटाले के मास्टरमाइंड के रूप में समीर अग्रवाल (CMD) और अन्य के नाम सामने आए हैं।
- प्रभावित क्षेत्र: यह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और दिल्ली में काम कर रही थी
500 करोड़ के LUCC घोटाले में CBI ने 46 आरोपियों के खिलाफ दर्ज किया मुकदमा, 2 अभिनेताओं के नाम भी शामिल
एलयूसीसी (लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसायटी) के 500 करोड़ के घोटाले में सीबीआई/एसीबी देहरादून ने 46 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है. हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने मुकदमा दर्ज किया है. सोसायटी के सदस्यों के खिलाफ प्रदेश के देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल, चमोली, टिहरी, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, बागेश्वर और नैनीताल जिले में 18 मुकदमे दर्ज हैं. घोटाले में एक जून 2024 को तृप्ति नेगी की ओर से कोतवाली कोटद्वार, जिला पौड़ी गढ़वाल में दी लिखित शिकायत के आधार पहला मुकदमा दर्ज किया गया था.
कई महिलाएं गुजर रही थीं तनाव से
हर इंसान अपनी मेहनत से जमा की गई पूंजी को बचाकर मुनाफा कमाने की उम्मीद रखता है. लेकिन यदि कोई व्यक्ति सालों तक पैसा जमा कर चिटफंड में निवेश करे और घोटाला होने पर उसकी मेहनत की कमाई डूब जाए, तो दर्द और परेशानियां स्वाभाविक हैं. ऐसी ही पीड़ा से हजारों लोग गुजर रहे हैं. सबसे अधिक परेशानी उन लोगों की है जिन्होंने लाखों रुपए देकर मेंबरशिप ली और फिर एजेंट बनकर अपने नीचे कई लोगों को जोड़ लिया. न सिर्फ उनका पैसा डूबा, बल्कि जिन लोगों को उन्होंने जोड़ा था, वे भी अब उन्हीं से अपना पैसा मांग रहे हैं.
राष्ट्रपति जी हैं उम्मीद
बल्कि उत्तराखंड की उन हजारों माताओं-बहनों के अटूट विश्वास की गूँज है, जिन्होंने अपना सब कुछ इस घोटाले में खो दिया है। जब नीचे की सारी व्यवस्थाएं और रसूखदार लोग आंखें मूंद लेते हैं, तब देश का सर्वोच्च पद ही ‘अंतिम आशा’ की किरण होता है।
संपत्तियों की तत्काल कुर्की: घोटालेबाजों की बेनामी संपत्तियों को बेचकर सबसे पहले इन बहनों और गरीब निवेशकों का मूलधन लौटाया जाए।
सरकारी जवाबदेही: राज्य और केंद्र की एजेंसियां यह बताएं कि इतने वर्षों तक यह फर्जीवाड़ा चलता रहा और किसी ने इसे रोका क्यों नहीं?
सुरक्षा और न्याय: जो लोग इस घोटाले के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, उन्हें सुरक्षा दी जाए और आरोपियों को विदेश से लाकर सजा दी जाए।





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