5 मई 2026 को दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल जैसे बड़े मंच पर उत्तराखंडी फीचर फिल्म ‘घंगतोल’ की स्क्रीनिंग हुई। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) जैसे प्रतिष्ठित स्थान पर क्षेत्रीय सिनेमा का प्रदर्शन होना हमारी संस्कृति की बढ़ती पहुंच और पहचान का प्रमाण है।
जब दिल्ली जैसे महानगरों में रहने वाला उत्तराखंडी समाज अपनी जड़ों से जुड़ी फिल्म देखने के लिए उमड़ता है, तो यह केवल मनोरंजन नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक एकजुटता का प्रतीक बन जाता है।
इस स्क्रीनिंग के कुछ खास मायने:
- सांस्कृतिक गौरव: प्रवासी उत्तराखंडियों के लिए यह अपनी भाषा, संगीत और रीति-रिवाजों को बड़े पर्दे पर अनुभव करने का एक भावुक पल रहा होगा।
- युवा पीढ़ी का जुड़ाव: दिल्ली जैसे शहरों में पली-बढ़ी नई पीढ़ी को अपनी ‘पौराणिक धरोहर’ और पहाड़ों की वास्तविकता को समझने का मौका मिला।
- सिनेमाई पहचान: उत्तराखंडी सिनेमा अब केवल क्षेत्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स में अपनी जगह बनाकर वैश्विक पहचान की ओर अग्रसर है।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) में ‘घंगतोल’ फिल्म के कलाकारों से मिलने का अवसर मिला। पहाड़ की संस्कृति और रीति-रिवाजों को सहेजने की दिशा में इस तरह के प्रयास वाकई सराहनीय हैं।
आज के समय में जब आधुनिकता की दौड़ में हम अपनी जड़ों को भूलते जा रहे हैं, तब ऐसी फिल्में समाज को आईना दिखाने का काम करती हैं। ‘घंगतोल’ जैसी फिल्में न केवल हमारी पौराणिक धरोहर को पुनर्जीवित करती हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को अपनी मिट्टी से जुड़ने की प्रेरणा भी देती हैं।
पहाड़ की संस्कृति और पुरानी परंपराओं को फिर से जीवित करने का आपका संकल्प बहुत महत्वपूर्ण है। अपनी विरासत पर गर्व करना और उसे अपनी जीवनशैली में वापस लाना ही अपनी पहचान को बचाए रखने का एकमात्र तरीका है।
उम्मीद है कि यह फिल्म जन-जन तक पहुंचेगी और लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौटने के लिए प्रेरित करेगी।





Comments
ऐतिहासिक परिवर्तन: पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार, तृणमूल का सूपड़ा साफ
ऐतिहासिक परिवर्तन: पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार, तृणमूल का सूपड़ा साफ
ऐतिहासिक परिवर्तन: पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार, तृणमूल का सूपड़ा साफ
ऐतिहासिक परिवर्तन: पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार, तृणमूल का सूपड़ा साफ
नंद ग्राम में उत्तरांचल भवन के सार्वजनिक उपयोग हेतु तत्काल प्रारंभ करने के लिए एकजुट हुआ पहाड़, भारतीय पर्वतीय महासभा ने शुरू की मुहिम