गाजियाबाद के नंद ग्राम में बनकर तैयार ‘उत्तरांचल भवन’ पिछले काफी समय से बंद पड़ा है। करोड़ों की लागत से बना यह भवन उत्तराखंडी प्रवासी समाज की सांस्कृतिक और सामाजिक जरूरतों के लिए था, लेकिन इसका संचालन न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। आज भारतीय पर्वतीय महासभा के पदाधिकारियों ने इस भवन को अविलंब जनता के लिए समर्पित करने हेतु एक व्यापक जन-मुहिम शुरू कर दी है।
स्तावित मांगें और बिंदु:
- शीघ्र संचालन: भवन का संचालन यथाशीघ्र प्रारंभ किया जाए ।
- संयुक्त संचालन समिति: एक ‘Joint Management Committee’ का गठन हो, जिसमें गाज़ियाबाद नगर निगम के अधिकारी और उत्तराखंड/पर्वतीय समाज के प्रतिनिधि समान रूप से शामिल हों ।
- संस्थागत भागीदारी: संचालन प्रक्रिया में समाज की संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो ।
- पारदर्शिता: बुकिंग प्रक्रिया पारदर्शी और स्पष्ट लिखित नीति के तहत हो ।
- प्राथमिकता: उत्तराखंड समाज के सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जाए ।
- निजीकरण का विरोध: भवन को किसी भी निजी या व्यावसायिक संस्था को हस्तांतरित न किया जाए ।
- न्यायसंगत किराया: किराए की दरें सार्वजनिक की जाएं और वे तर्कसंगत हों ।
- समयबद्ध योजना: 30 दिन के भीतर समिति का गठन और 60 दिन के भीतर संचालन शुरू करने की कार्ययोजना बने ।
“जब तक उत्तरांचल भवन जनता का नहीं हो जाता, महासभा का संघर्ष जारी रहेगा।”


सभी प्रवासियों से अनुरोध है कि इस मुहिम से जुड़ें और अपनी आवाज बुलंद करें। साझा करें ताकि प्रशासन तक हमारी गूँज पहुँचे!





Pingback: सीएम योगी और भारतीय पर्वतीय महासभा की मुलाकात: एक्सप्रेसवे से लेकर उत्तरांचलभवन तक, पर्वतीय हित