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शिवाजी नगर, वैशाली में विराट हिंदू सम्मेलन  छठा और अंतिम भव्य कार्यक्रम रामप्रस्थ ग्रीन्स, सेक्टर-7, वैशाली में 22 फरवरी को आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में समाज के हर वर्ग की अधिकतम भागीदारी रही। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में   विशाल हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में सज्जन शक्ति को संगठित कर समाज को सकारात्मक दिशा देने का आवाहन किया गया। विराट हिंदू सम्मेलन के अंतर्गत निकाली जाने वाली कलश यात्रा भव्य यात्रा में सैकड़ों-हजारों महिलाओं द्वारा पारंपरिक पोशाक में सिर पर कलश रखकर भाग लिया जाता है, जिसमें अक्सर ‘जय श्री राम’ के जयकारों के साथ धर्म ध्वजाएं लहराई गयी.

इस समापन समारोह की गरिमा बढ़ाने के लिए विश्व प्रसिद्ध सनातनी संत, समाज सुधारक एवं आध्यात्मिक गुरु स्वामी दीपांकर जी महाराज मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।  स्वामी दीपांकर महाराज ने हिंदू समाज से जातिगत भेदभाव त्याग कर एकजुट होने और 2026 में जातिवाद को समाप्त करने का आह्वान किया स्वामी जी का मार्गदर्शन इस क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगा।स्वामी दीपंकर जी महाराज ने अपने संबोधन में बांग्लादेश की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां हिंदुओं की हत्याओं के दौरान किसी की जाति नहीं पूछी गई, सभी को केवल उनके धर्म के आधार पर निशाना बनाया गया। उन्होंने चेताया कि यदि हिंदू समाज आपसी भेदभाव में बंटा रहा, तो इसके दुष्परिणाम और गंभीर हो सकते हैं। उनके इस संदेश ने सम्मेलन में उपस्थित जनसमूह को गंभीर चिंतन के लिए प्रेरित किया।उन्होंने महिलाओं से भी समाज को एकजुट करने की मुहिम में आगे आने की अपील की। स्वामी दीपांकर ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में शोभायात्राओं और धार्मिक आयोजनों पर हो रही घटनाएं समाज के लिए चेतावनी हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिंदू समाज को एक मंच पर आना ही होगा।


श्रीमान अतुल जी: विभाग प्रचारक, गाजियाबाद विभाग (मुख्य वक्ता)।  सनातन परंपरा एवं हिंदू धर्म के उत्थान के लिए संगठित होकर कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने पंच परिवर्तनों — कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य, सामाजिक समरसता तथा स्व-आधारित जीवन के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों की 100 वर्षों की तपस्या, त्याग एवं सेवा कार्यों के कारण समाज जागृत हो रहा है। उन्होंने परिवार की मजबूती हेतु परिवार में उचित गुणों का विकास, पर्यावरण की सुरक्षा एवं नागरिक कर्तव्यों के पालन का भी आह्वान किया।

श्रीमान देवेंद्र जी: विभाग कार्यवाह, गाजियाबाद विभाग (वक्ता)।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में डॉ. हेडगेवार द्वारा संपूर्ण हिंदू समाज के संगठन के उद्देश्य से की गई थी। संघ ने विपरीत परिस्थितियों में भी हिंदू समाज को संगठित करने के लिए निरंतर कार्य किया है।उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को तोड़ने का प्रयास कर रहे लोगों को बेनकाब करना होगा। उन्होंने सभी से जाति-पाति से ऊपर उठकर समाज एवं देश की मजबूती हेतु कार्य करने का आह्वान किया।

विराट  हिंदू सम्मेलन में सुंदर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गई। विराट हिंदू सम्मेलन के दौरान सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली सज्जन शक्ति का सम्मान भी किया गया। अंत में सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक जागरुकता एवं संगठित समाज निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया गया।

 

 

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