“जहाँ चाह, वहाँ राह… और जहाँ नेक इरादा हो, वहाँ समान विचारधारा वाले ढेरों लोग साथ जुड़ ही जाते हैं! 22 जनवरी 2026 दोपहर 3:00 से 5:00 बजे के बीच हिंडन नदी के तट पर एक विशाल सफाई अभियान चलाया गया। इस अभियान की सबसे खास बात विभिन्न संस्थाओं और नागरिकों का एक साथ आना रही। 2 घंटों के भीतर नदी से लगभग 300 किलो अजैविक कचरा (non-biodegradable waste) और पूजन सामग्री निकाली गई।इस नेक कार्य के लिए लगभग 100 लोग स्वेच्छा से आगे आए और श्रमदान किया।स अभियान को सफल बनाने में निम्नलिखित संस्थाओं ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया: होप फाउंडेशन गाजियाबाद में नदी के घाटों की सफाई और प्लास्टिक कचरा प्रबंधन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

‘हिंडन मित्र’ अभियान: 22 जनवरी के फाउंडेशन ने स्थानीय स्कूलों के साथ मिलकर छात्रों को ‘हिंडन मित्र’ के रूप में प्रशिक्षित किया है, जो अपने-अपने क्षेत्रों में नदी प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता फैला रहे हैं। डॉ. असित खन्ना (Dr. Asit Khanna) गाजियाबाद के एक अत्यंत प्रतिष्ठित कार्डियोलॉजिस्ट (हृदय रोग विशेषज्ञ) हैं, जो न केवल चिकित्सा के क्षेत्र में बल्कि हिंडन नदी के पुनरुद्धार और सामाजिक कार्यों में भी एक प्रमुख चेहरा हैं

प्लास्टिक से बेंचेस: फाउंडेशन का एक अनोखा अभियान है जिसमें लोग प्लास्टिक दान करते हैं और उसके बदले फाउंडेशन उन्हें रिसाइकल्ड प्लास्टिक से बनी बेंचेस प्रदान करता है। यह मॉडल जनवरी 2026 में हिंडन किनारे की बस्तियों में कचरा कम करने के लिए प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है।

HOPE Foundation: जन-भागीदारी और स्वच्छता

Gram Niyojan Kendra (ग्राम नियोजन केंद्र)

GMA (गाजियाबाद मैनेजमेंट एसोसिएशन)

IMA (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन)

Shriram Pistons & Rings Ltd.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में हुआ आयोजन

  • उपस्थित श्रद्धालुओं को मिला जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी यतीन्द्र आनन्द गिरी जी महाराज और प्रेमेश्वर पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी सतीशाचार्य जी महाराज का सानिध्य
  • श्रीमान आनन्द जी (प्रांत सह प्रचारक, मेरठ प्रांत, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) श्रीमान श्रीकांत जी (महानगर कार्यवाह, वैशाली महानगर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) ने किया संबोधित

18 जनवरी, 2026,
वैशाली, गाजियाबाद हिंदू समाज की एकता, बंधुत्व, एवं स्वाभिमान को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में 18 जनवरी, 2026 (रविवार) को गाजियाबाद के वैशाली, सेक्टर-5 में ‘विराट हिन्दू सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। सम्मेलन में उपस्थित श्रद्धालुओं को श्री स्वामी यतीन्द्र आनन्द गिरी जी महाराज, महामंडलेश्वर, जूना अखाड़ा और अनंत श्री विभूषित जगदगुरु रामानंदाचार्य प्रेमेश्वर पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी सतीशाचार्य जी महाराज का सानिध्य प्राप्त हुआ। उपस्थित जनों को श्रीमान आनन्द जी (प्रांत सह प्रचारक, मेरठ प्रांत, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) श्रीमान श्रीकांत जी (महानगर कार्यवाह, वैशाली महानगर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) ने संबोधित किया।

इस अवसर पर, आरएसएस के वक्ताओं ने हिन्दू समाज से पांच संकल्पों को अपनाने का आह्वान किया: सामाजिक समरसता, पर्यावरण एवं जल संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, स्व आधारित जीवन, और नागरिक कर्तव्यबोध। उन्होंने समाज के लोगों से भारतीय संस्कृति और संस्कारों को अपने जीवन में शामिल करने की अपील की और जातीय भेदभाव को समाप्त करके समाज में एकता स्थापित करने पर जोर दिया।

⁠विराट हिंदू सम्मेलन के लिए सुबह साढ़े नौ बजे एक भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। यात्रा कामना मंदिर परिसर से गाजेबाजे और सजी-धजी बग्घी के साथ शुरू हुई और वैशाली के विभिन्न मार्गों से होते हुए सम्मेलन स्थल पर पहुंची। गणेश वन्दना से शुरू हुए मुख्य आयोजन में बच्चों के कई रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल थे। इसमें लव जिहाद पर एक लघु नाटिका भी शामिल थी। इस कार्यक्रम में स्थानीय पार्षद के साथ-साथ समाज के कई गणमान्य लोग भी उपस्थित थे। विराट हिन्दू सम्मेलन का समापन समरसता भोज के साथ हुआ

उत्तराखण्ड का लोकपर्व घुघुतिया त्योहार, उत्तरैणी और मकर संक्रांति पर्व के उपलक्ष में उत्तराखण्ड धरोहर संरक्षण समिति (पंजी०), वैशाली, गाज़ियाबाद के पदाधिकारियों ने 14/01/2026 बुधवार की रात को कड़कड़ाती ठंड से बचाने के लिए लाचार, असहाय व गरीबों को कंबल वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया।

संस्था के पदाधिकारियों ने दिल्ली में एम्स, सफदरजंग, राम मनोहर लोहिया अस्पतालों के बाहर और बस स्टैंड पर, सड़क के किनारे पटरियों पर सोते हुए जिन्हें वास्तविक में कंबल की जरूरत थी उन्हें ढूंढ ढूंढ कर दिया गया।

उत्तराखण्ड धरोहर संरक्षण समिति (पंजी०) धर्म और जाति बंधन से दूर हटकर गरीबों और असहाय लोगों की हर संभव मदद करती है।

इस मुहिम में अध्यक्ष श्री मदन सिंह बिष्ट, उपाध्यक्ष श्री मोहन सिंह बिष्ट, महासचिव श्रीमती सविता गुसाईं, सचिव श्री गोपाल सिंह धामी, सह कोषाध्यक्ष श्री धीरेन्द्र बर्त्वाल, सलाहकार डॉ रामेश्वरी नादान, सांस्कृतिक सह सचिव श्रीमती शशि पाठक, सलाहकार श्री अलक्षेन्द्र सिंह नेगी, सलाहकार श्री राजेन्द्र डालाकोटी, सलाहकार श्री महेंद्र सिंह देउपा, सेक्टर प्रभारी श्री हेम चन्द्र बधानी एवं सेक्टर प्रभारी श्री मोहन चंद्र पंत जी मौजूद रहे।

देवभूमि उत्तराखंड के रामनगर का यह नायाब हीरा, मुकेश सुयाल, आज उन हजारों युवाओं के लिए रोल मॉडल है जो समाज सेवा करना चाहते हैं। उनका कार्य यह याद दिलाता है कि दुआएं कमाने के लिए किसी पद की नहीं, बस एक साफ दिल की जरूरत होती है।मुकेश सुयाल जी जैसे लोग समाज के वे स्तंभ हैं, जो बिना किसी शोर-शराबे के चुपचाप मानवता की सेवा में जुटे रहते हैं। रामनगर की सुंदर वादियों के बीच उनकी इस नेकदिली की चर्चा अब हर जुबान पर है। मुकेश जी ने उन बच्चियों को केवल ईंट-पत्थरों का मकान नहीं दिया, बल्कि उन्हें “भयमुक्त भविष्य” और “आत्मसम्मान” उपहार में दिया है। रामनगर और पूरी देवभूमि को अपने इस बेटे पर गर्व होना चाहिए।

मुकेश सुयाल: रामनगर का वह ‘नायाब हीरा’ जिसने इंसानियत को मजहब से ऊपर रखा

मुकेश सुयाल। रामनगर के इस व्यक्तित्व ने यह सिद्ध कर दिया है कि दुआएं कमाने के लिए किसी ऊंचे पद या सत्ता की नहीं, बल्कि एक साफ़ दिल और अटूट संकल्प की जरूरत होती है।

मरते पिता का वचन

इंसानियत की सबसे भावुक मिसाल तब देखने को मिली जब एक बेबस पिता ने अपनी अंतिम सांसें गिनते हुए मुकेश भाई का हाथ थामा और अपनी बेटियों का भविष्य उन्हें सौंप दिया। उस पिता ने कहा था— “मुकेश भाई, मेरी बच्चियों को अकेला मत छोड़ना, उनके लिए एक घर बना देना।”

जहाँ दुनिया वादे करके भूल जाती है, वहीं मुकेश सुयाल ने इस वचन को किसी पवित्र अनुष्ठान की तरह लिया। टूटी-फूटी झोपड़ी में रहने वाली उन बिन माँ-बाप की बच्चियों के लिए मुकेश जी ने रात-दिन एक कर दिया और मात्र १० दिनों के भीतर एक पक्का घर तैयार कर खड़ा कर दिया। जब वे बच्चियां पहली बार उस चौखट के अंदर गईं, तो उनकी आँखों से बहते आंसू इस बात के गवाह थे कि अब वे इस दुनिया में अनाथ नहीं हैं। मुकेश जी ने उन्हें केवल छत नहीं दी, बल्कि एक “भयमुक्त भविष्य” और “आत्मसम्मान” उपहार में दिया।

मृत्यु के बाद का सम्मान: मजहब से ऊपर इंसानियत

आज के दौर में जहाँ समाज अक्सर धर्म और दीवारों में बंटा नजर आता है, वहाँ मुकेश सुयाल साम्प्रदायिक सौहार्द की एक जीवंत मिसाल पेश कर रहे हैं। वे केवल जीवित लोगों के मददगार नहीं हैं, बल्कि वे उन लावारिस मृत आत्माओं के भी रक्षक हैं जिनका इस दुनिया में कोई नहीं बचा।

मुकेश जी लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार उनके धर्म के अनुसार करते हैं। यदि मृतक हिंदू है, तो वे पूरे विधि-विधान से मुखाग्नि देते हैं और यदि मुस्लिम है, तो पूरी शिद्दत के साथ उन्हें सुपुर्द-ए-खाक (दफन) करते हैं। यह कार्य हर इंसान को मरने के बाद सम्मान पाने का अधिकार सुनिश्चित करता है।

मुकेश सुयाल जी की समाज सेवा किसी एक दायरे में सीमित नहीं है, बल्कि वे एक ‘सर्वांगीण सेवा’ के मिशन पर हैं:

  1. स्वास्थ्य (Health): अस्पतालों में सुबह-शाम मरीजों की तीमारदारी करना और गरीब परिवारों के लिए दवाओं का प्रबंध करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है।
  2. आवास (Shelter): बेसहारा लोगों के सिर पर सुरक्षित छत बनाना।
  3. बुनियादी जरूरतें (Basics): जरूरतमंदों तक समय पर भोजन और वस्त्र पहुँचाना।
  4. अंतिम विदाई (Dignity): लावारिस देह को ससम्मान विदाई देना।

युवाओं के लिए रोल मॉडल

बिना किसी शोर-शराबे और तामझाम के चुपचाप सेवा में जुटे मुकेश सुयाल आज उत्तराखंड के हजारों युवाओं के लिए एक ‘रोल मॉडल’ बन चुके हैं। उनका जीवन सिखाता है कि समाज सेवा केवल धन से नहीं, बल्कि शारीरिक श्रम और संवेदना से होती है। रामनगर और पूरी देवभूमि को अपने इस बेटे पर गर्व है।


मदद करने का जज्बा रखिए, रास्ते अपने आप बन जाएंगे

जीते जी तो सब अपनों की सेवा करते हैं, असली इंसान वही जो गैरों की मैयत को कंधा दे जाए और अनाथों का हाथ थाम ले।


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उत्तराखंड की देवभूमि में जब भी पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक एकजुटता की बात होगी, अल्मोड़ा के एक युवा का नाम प्रमुखता से लिया जाएगा— शंकर सिंह बिष्ट। मात्र 23 वर्ष की आयु में, शंकर ने हिमालयी पारिस्थितिकी को बचाने के लिए जो समर्पण दिखाया है, वह आज के युवाओं के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत है। हिमालयी क्षेत्रों में एक पुरानी कहावत है— “पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी, पहाड़ के काम नहीं आती।” लेकिन अल्मोड़ा के युवा पर्यावरणविद शंकर सिंह बिष्ट ने इस धारणा को बदलने का बीड़ा उठाया है। उन्होंने जल संरक्षण को केवल एक अभियान नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन बना दिया है।

जन्म और पृष्ठभूमि

शंकर का जन्म अल्मोड़ा जिले के एक सुदूर गांव चनौला में हुआ। पहाड़ों की गोद में पले-बढ़े शंकर ने प्राथमिक शिक्षा अपने गांव से ही प्राप्त की और स्नातक की पढ़ाई के लिए जयपुर गए। 2020 में शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने किसी शहरी नौकरी के पीछे भागने के बजाय अपनी जड़ों की ओर लौटने और अपनी मिट्टी के कर्ज को चुकाने का संकल्प लिया।

मिशन: पंचतत्व का संतुलन

शंकर का मानना है कि जीवन का आधार पाँच तत्व हैं— जल, वायु, मृदा, आकाश और अग्नि। आज के समय में बढ़ते पर्यावरण क्षरण ने इस संतुलन को बिगाड़ दिया है। शंकर का मिशन सामुदायिक भागीदारी और पारंपरिक ज्ञान के माध्यम से इसी संतुलन को बहाल करना है।

प्रमुख उपलब्धियाँ और कार्य

1. जल और वन संरक्षण का नया मॉडल

शंकर ने रामगंगा घाटी और कुमाऊं के कई गांवों (जैसे भातकोट, खजुरानी, नाईगर) में जल संकट को दूर करने के लिए धरातल पर काम किया है।

  • पारंपरिक जल स्रोतों का पुनरुद्धार: उन्होंने हिमालय की प्राचीन जल प्रणालियों— नौलों और धारों को पुनर्जीवित किया।
  • चाल-खाल और खंतिया: भूजल स्तर को सुधारने के लिए उन्होंने पारंपरिक ‘चाल-खाल’ और ‘खंतिया’ (छोटे गड्ढे) का निर्माण करवाया।
  • मिश्रित वन: चीड़ के जंगलों के बीच उन्होंने स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए ताकि मिट्टी की नमी बनी रहे।

2. 300 किमी की रामगंगा पदयात्रा

नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को समझने के लिए शंकर ने पश्चिमी रामगंगा के उद्गम से संगम तक 300 किलोमीटर की शोध यात्रा का नेतृत्व किया। इसमें 50 से अधिक शोधकर्ताओं और पर्यावरणविदों ने भाग लिया। इस यात्रा का उद्देश्य नदी की जैव विविधता, सांस्कृतिक महत्व और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का दस्तावेजीकरण करना था।

3. 700 किमी की पदयात्रा और वन अग्नि रोकथाम

अप्रैल 2022 में, जब उत्तराखंड के जंगल आग से धधक रहे थे, तब शंकर ने चनौला से राष्ट्रपति भवन (दिल्ली) तक 700 किमी की पैदल यात्रा की। उनकी मांग थी कि वनाग्नि की रोकथाम के लिए नीतियों को मजबूत किया जाए और इसमें स्थानीय समुदायों को सीधे जोड़ा जाए।

4. जागेश्वर के 1,000 देवदारों की रक्षा

जब सड़क चौड़ीकरण के नाम पर जागेश्वर के 1,000 से अधिक पवित्र देवदार के पेड़ों को काटने की योजना बनी, तो शंकर ने इसके खिलाफ एक बड़ा जन आंदोलन खड़ा किया। उनके शांतिपूर्ण विरोध और दृढ़ संकल्प के कारण इन पेड़ों को कटने से बचा लिया गया।

आजीविका और स्वरोजगार: ‘धुरफाट’ की पहचान

शंकर केवल प्रकृति नहीं बचा रहे, बल्कि पहाड़ों से हो रहे पलायन को रोकने के लिए सशक्त आजीविका मॉडल भी पेश कर रहे हैं:

  • मशरूम उत्पादन: भातकोट में महिलाओं को मशरूम की खेती का प्रशिक्षण दिलवाया।
  • हिमालयी मौन पालन (Beekeeping): पारंपरिक लकड़ी के बक्सों में शहद उत्पादन को बढ़ावा देकर ग्रामीणों की आय बढ़ाने का काम कर रहे हैं।
  • धुरफाट: उन्होंने पारंपरिक हिमालयी डेयरी पहचान ‘धुरफाट’ को पुनर्जीवित किया है, जो स्थानीय खाद्य सुरक्षा और स्वावलंबन का प्रतीक है।

सम्मान और पुरस्कार

शंकर के कार्यों की गूंज शासन और प्रशासन तक भी पहुंची है:

  • उत्तराखंड के मुख्यमंत्री द्वारा ‘जलदूत’ सम्मान।
  • UCOST द्वारा ‘वसुंधरा अमृत सम्मान’
  • ‘मैथान रत्न’ पुरस्कार
  • एक कदम पहाड़ की ओर (पर्यावरण संरक्षण हेतु) 2025-26
  • सहपाठी फाउंडेशन द्वारा उनके कार्यों पर एक डॉक्यूमेंट्री का निर्माण।

शंकर सिंह बिष्ट के लिए पर्यावरण कार्य कोई पेशा नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के प्रति एक जिम्मेदारी है। “रविवार प्रकृति के नाम” जैसे अभियानों के जरिए वे आज भी गांव-गांव जाकर बच्चों और युवाओं को प्रकृति से जोड़ रहे हैं।जल संरक्षण केवल गड्ढे खोदना नहीं है, यह अपनी जड़ों और संस्कृति से दोबारा जुड़ने की प्रक्रिया है। जब तक समाज पानी को अपना कर्तव्य नहीं समझेगा, तब तक संकट बना रहेगा।”

 7वाँ द्वारका उत्तराखण्डी उत्तरायणी महोत्सव- 2026

द्वारका उत्तराखण्डी उत्तरायणी समिति द्वारा आयोजित 7वाँ द्वारका उत्तराखण्डी उत्तरायणी महोत्सव- 2026 दिल्ली के द्वारका क्षेत्र में रहने वाले प्रवासी उत्तराखण्डी समुदाय के लिए एक बड़ा सांस्कृतिक पर्व है। यह महोत्सव न केवल उत्तरायणी (मकर संक्रांति) के स्वागत का प्रतीक है, बल्कि देवभूमि की समृद्ध लोक विरासत को महानगर में जीवंत करने का एक साझा मंच भी है। इस बार महोत्सव में उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक कलाकार जैसे इंदर आर्या (Inder Arya), किशन महिपाल (Kishan Mahipal) और रेशमा शाह (Reshma Shah) अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधा. इस बार मंच पर उत्तराखंड के वो सितारे आये जिनकी आवाज़ आज हर पहाड़ी के दिल में बसती है:

इंदर आर्या (Inder Arya): अपने सुपरहिट गीतों (जैसे ‘गुलाबी शरारा’) से युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय इंदर आर्या महोत्सव में जोश भर दिया .

किशन महिपाल (Kishan Mahipal): अपनी मखमली आवाज़ और पारंपरिक धुनों के लिए मशहूर किशन महिपाल गढ़वाली संस्कृति की महक बिखेरा दिया।

रेशमा शाह (Reshma Shah): जौनसारी और पहाड़ी लोक गीतों की प्रसिद्ध गायिका रेशमा शाह अपनी ऊर्जावान प्रस्तुति से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

नीरज बवाड़ी  मंच संचालक ने कार्यक्रम को रोचक, प्रभावी और सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका  निभाई ।

इस भव्य महोत्सव में उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराओं, लोकनृत्य और सामाजिक एकता का अद्भुत व जीवंत प्रदर्शन देखने को मिला. महोत्सव में सिर्फ संगीत ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड का स्वाद और पहनावा भी मुख्य आकर्षण रहा: पारंपरिक वेशभूषा: पिचोड़ा, नथ और पहाड़ी टोपी में सजे लोग ‘लघु उत्तराखंड’ का अहसास कराया। स्टॉल्स पर पहाड़ी की बाल मिठाई, सिंगौड़ी, गहत की दाल, और झंगोरे की खीर जैसे पारंपरिक व्यंजनों का लुत्फ उठाने का मौका मिला साथ ही झौड़ा-चांचरी: कलाकारों के साथ-साथ आम जनता भी पारंपरिक सामूहिक नृत्यों का हिस्सा रहा । मुख्य कलाकारों की प्रस्तुतियां और शाम की चमक इस कौतिक (मेले) को और भी खास बना दिया .यह आयोजन केवल एक मेला नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी के प्रति प्रेम और देवभूमि की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का एक महाकुंभ साबित हुआ. देवभूमि की “अतिथि देवो भव:” की परंपरा को निभाते हुए आगंतुकों का स्वागत और सम्मान।

इस भव्य महोत्सव को सफल बनाने में द्वारका उत्तराखण्डी उत्तरायणी समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों का निस्वार्थ योगदान रहा। आयोजन की योजना से लेकर उसके क्रियान्वयन तक, कार्यकारिणी ने हर मोर्चे पर अपनी कुशलता सिद्ध की।

समिति के अध्यक्ष प्रेम सिंह रावत, कार्यकारिणी समिति , आयोजकों को इस सफल एवं भव्य आयोजन के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। जय बद्री-केदार! जय उत्तराखंड!

हिंदू समाज को संगठित करने, उसमें स्वाभिमान जगाने, और समरसता बढ़ाने के प्रयासों के तहत, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की महत्वपूर्ण पहल “विराट हिंदू सम्मेलन” की तैयारी आज शुरू हुई। वैशाली सेक्टर-4 में 25 जनवरी को होने वाले इस सम्मेलन के आयोजन के लिए कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई।

विराट हिंदू सम्मेलन इन मुख्य उद्देश्यों पर आधारित है:1. एकता और समरसता: हिंदू समाज के सभी वर्गों को एकजुट करना और आपसी वैमनस्यता दूर करना।2. सामाजिक मजबूती: हिंदू समाज की कमजोरियों को दूर करके उसे मजबूत और ऊर्जावान बनाना।3. राष्ट्र निर्माण: युवाओं को राष्ट्र निर्माण के कार्य से जोड़ना और उनमें नेतृत्व क्षमता विकसित करना।4. सांस्कृतिक पुनर्जागरण: सनातन परंपरा, संस्कृति और, संस्कारों को बढ़ावा देना।5. पर्यावरण जागरूकता: पंच परिवर्तन के माध्यम से पर्यावरण के प्रति समाज को जागरूक करना।

कार्यक्रम के आयोजन के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारी वरुण जी, मदन मोहन जी, कपिल जी, सौरभ जी आदि स्वयंसेवकों के अलावा, समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

हिंदू समाज को संगठित करने, उसमें स्वाभिमान जगाने, और समरसता बढ़ाने के प्रयासों के तहत, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की महत्वपूर्ण पहल “विराट हिंदू सम्मेलन” की तैयारी आज शुरू हुई। वैशाली सेक्टर-5 में 18 जनवरी को होने वाले इस सम्मेलन के आयोजन के लिए कार्यकारिणी की घोषणा की गई और कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई।
विराट हिंदू सम्मेलन इन मुख्य उद्देश्यों पर आधारित है:1. एकता और समरसता: हिंदू समाज के सभी वर्गों को एकजुट करना और आपसी वैमनस्यता दूर करना।2. सामाजिक मजबूती: हिंदू समाज की कमजोरियों को दूर करके उसे मजबूत और ऊर्जावान बनाना।3. राष्ट्र निर्माण: युवाओं को राष्ट्र निर्माण के कार्य से जोड़ना और उनमें नेतृत्व क्षमता विकसित करना।4. सांस्कृतिक पुनर्जागरण: सनातन परंपरा, संस्कृति और, संस्कारों को बढ़ावा देना।5. पर्यावरण जागरूकता: पंच परिवर्तन के माध्यम से पर्यावरण के प्रति समाज को जागरूक करना।

विराट हिंदू सम्मेलन के आयोजन के लिए आज हुई बैठक में पार्षद राजकुमार भी शामिल हुए और सक्रिय भागीदारी की घोषणा की। बैठक में, कार्यक्रम के आयोजन के लिए अध्यक्ष चुने गए सतीश गोयल के साथ ही, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारी कामेश्वर नाथ, ऋषिकांत , महेंद्र, साकेत मणि, और स्वयंसेवकों के अलावा, समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
Details

कीर्तन मंडलियों द्वारा के साथ 2026 का स्वागत

  • कल्पना सोसाइटी, वैशाली ने साल 2026 की शुरुआत इतने सुंदर और भक्तिमय तरीके से की
  • भक्तिमय माहौल: स्थानीय गायकों और कीर्तन मंडलियों द्वारा प्रस्तुत भजनों पर सोसाइटी के बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने एक साथ मिलकर नृत्य किया और भक्ति का आनंद लिया।
  • सामूहिक प्रार्थना: ‘हैप्पी न्यू ईयर’ के साथ भगवान के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। निवासियों ने 2026 के लिए सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की।

कल्पना सोसाइटी, वैशाली की नवर्तमान RWA कार्यकारिणी टीम ने इतनी सक्रियता के साथ 2026 का स्वागत किया है। अध्यक्ष रवींद्र सिंह रावत जी के नेतृत्व में इस टीम ने भक्ति और संस्कृति को जो महत्व दिया है, वह सराहनीय है।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में जिन प्रमुख चेहरों का योगदान रहा, उनकी सूची और उनके प्रयासों का विवरण यहाँ दिया गया है:अध्यक्ष श्री रवींद्र सिंह रावत ,

कल्पना सोसाइटी RWA कार्यकारिणी टीम (2026)

पदनाम
अध्यक्षश्री रवींद्र सिंह रावत
महासचिवश्री तरुण
उपाध्यक्षश्रीमती मधु
कोषाध्यक्षश्री रोहित रावत

कार्यकारिणी सदस्य :

बीना रावत, मोनी गुप्ता ,लाल सिंह बिष्ट, दीपा डोडियाल, बीना पालीवाल, दीपा नेगी, पुष्पा लमकोटी, सुनीता दुष्यंत और भागीरथी चंदोलिया


आयोजन की मुख्य झलकियाँ

  • गर्जिया नैना कीर्तन मंडली का जादू: इस उत्सव का मुख्य आकर्षण गर्जिया नैना कीर्तन मंडली की प्रस्तुति रही। उनकी सुरीली और भक्तिपूर्ण आवाज़ ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया।
  • सामूहिक नृत्य और उत्साह: कीर्तन मंडली के भजनों पर अध्यक्ष रवींद्र सिंह रावत और उनकी पूरी टीम के साथ-साथ सोसाइटी के निवासियों ने जमकर नृत्य किया। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे का प्रतीक बन गया।
  • महिला टीम का विशेष योगदान: बीना रावत, दीपा डोडियाल और टीम की अन्य महिला सदस्यों ने जिस तरह से आयोजन का प्रबंधन किया, उसने कार्यक्रम की शोभा बढ़ा दी।

उत्सव की मुख्य विशेषताएं

  • एकता का दृश्य: जब कीर्तन मंडलियों ने ढोलक और मंजीरों की थाप पर भजन शुरू किए, तो बच्चों की मासूमियत, युवाओं का जोश और बुजुर्गों का अनुभव एक साथ मंच पर दिखाई दिया। यह दृश्य “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना को जीवंत करता है।
  • भक्ति और नृत्य: भक्ति का आनंद केवल शांत बैठने में नहीं, बल्कि उसे झूम कर व्यक्त करने में भी है। सोसाइटी के निवासियों का भजनों पर नृत्य करना यह दिखाता है कि आध्यात्मिकता हमें खुशी और ऊर्जा से भर देती है।
  • संस्कारों का संचार: बच्चों को अपने दादा-दादी और माता-पिता के साथ इस तरह के कार्यक्रमों में शामिल होते देख यह स्पष्ट होता है कि वे अपनी जड़ों और संस्कृति को करीब से महसूस कर रहे हैं।

सफलता की मुस्कान: गरमा-गरम चाय की चुस्कियों के साथ, लोगों ने गर्जिया नैना कीर्तन मंडली की सराहना की और 2026 के लिए एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं।

चाय-पकौड़े की जुगलबंदी: जब कीर्तन की समाप्ति हुई, तो सभी निवासियों ने साथ बैठकर चाय और पकौड़ों का आनंद लिया। इस साधारण से नाश्ते ने सामूहिक एकता को और मजबूत कर दिया।

पर्यावरण संरक्षण के प्रति उत्तराखंडी कितने सजग हैं, इसका उदाहरण अल्मोड़ा के शकंर सिंह बिष्ट हैं। महज 22 साल की उम्र में शंकर, चौखुटिया से गैरसैंण-देहरादून होते हुए दिल्ली की पदयात्रा  उनका मकसद है उत्तराखंड के पर्यावरणीय संसाधनों की रक्षा का संदेश जन जन तक पहुंचाना।

चौखुटिया : पर्यावरण सुरक्षा एवं वनों को आग से बचाने का संदेश जनजन तक पहुंचाने को लेकर सीमांत गांव चनौला-खजुरानी से पदयात्रा पर निकले पर्यावरणप्रेमी शंकर सिंह बिष्ट दिल्ली पहुंच गए हैं। वेस्ट विनोद नगर में पहाड़ी समाज के लोगों ने फूल मालाओं से उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। शंकर ने बताया कि उनकी 650 किमी की पैदल यात्रा 17 दिन में पूर्ण हुई। इसमें उन्होंने स्थान-स्थान पर आमजन को पर्यावरण सुरक्षा के लिए जंगलों को आग से बचाने का संदेश दिया। बताया कि जब जंगल सुरक्षित रहेंगे तो धरती पर जीवन सुरक्षित रहेगा।

यहां बता दें कि पर्यावरणप्रेमी शंकर सिंह बिष्ट ने एक अन्य साथी प्रमोद बिष्ट को साथ लेकर यह यात्रा एक अप्रैल को विकास खंड के चनौला (खजुरानी) गांव से शुरू की। जो चौखुटिया, गैरसैंण, कर्णप्रयाग, श्रीनगर, देवप्रयाग, ऋषिकेश, देहरादून, रुड़की, मेरठ होते हुए रविवार देर सायं दिल्ली पहुंची। जहां वेस्ट विनोद नगर में पहाड़ी समाज के लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया। शंकर सिंह बिष्ट ने पदयात्रा के अपने अनुभव बताए। कहा कि पर्यावरण सुरक्षा व संरक्षण को जनसहभागिता जरूरी है।

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