उत्तराखंड धरोहर संरक्षण समिति द्वारा आज एक भव्य ‘होली मिलन समारोह’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में रंगों, उत्साह और उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति का सुंदर संगम देखने को मिला। वैशाली सेक्टर पांच में उत्तराखंड धरोहर संरक्षण समिति द्वारा आयोजित होली मिलन उत्सव में कलाकारों ने पारम्परिक उत्तराखंडी होली की झटा बिखेर दी. कार्यक्रम में पारम्परिक नृत्य झोड़ा, खड़ी होली, बैठकी होली ने दर्शकों का मन मोह लिया. उत्तराखंड की रंगबिरंगी पारम्परिक वेशभूषा के रंग समारोह की शोभा बढ़ा रहे थे. पहाड़ी बाध्य यंत्रों मशकबीन, रणसिंघा, ढोल दमाऊ की मधुर युगलबंदी के साथ होलीयारों शोभायात्रा निकाली जिसका लोगों भव्य स्वागत किया. लोक गायक पूर्ण पांडे और शशि पांडे ने रंगारंग प्रस्तुतियों से दर्शकों की वाही वाही लूटी. समिति के अध्यक्ष मदन सिंह बिष्ट और महासचिव सविता गोसाईं ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।

समारोह का मुख्य आकर्षण पारंपरिक बैठकी होली और खड़ी होली रही, जहाँ कलाकारों ने कुमाऊँनी और गढ़वाली लोक गीतों के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। उत्तराखंडी समाज को अपनी जड़ों से जोड़ना और विलुप्त हो रही सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण करना है। झांकियों के साथ-साथ जब ढोल-दमाऊ और हुड़के की थाप गूँजी, तो पूरा वातावरण ‘उत्तराखंडी रंग’ में सराबोर हो गया।

शिवाजी नगर, वैशाली में विराट हिंदू सम्मेलन  छठा और अंतिम भव्य कार्यक्रम रामप्रस्थ ग्रीन्स, सेक्टर-7, वैशाली में 22 फरवरी को आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में समाज के हर वर्ग की अधिकतम भागीदारी रही। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में   विशाल हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में सज्जन शक्ति को संगठित कर समाज को सकारात्मक दिशा देने का आवाहन किया गया। विराट हिंदू सम्मेलन के अंतर्गत निकाली जाने वाली कलश यात्रा भव्य यात्रा में सैकड़ों-हजारों महिलाओं द्वारा पारंपरिक पोशाक में सिर पर कलश रखकर भाग लिया जाता है, जिसमें अक्सर ‘जय श्री राम’ के जयकारों के साथ धर्म ध्वजाएं लहराई गयी.

इस समापन समारोह की गरिमा बढ़ाने के लिए विश्व प्रसिद्ध सनातनी संत, समाज सुधारक एवं आध्यात्मिक गुरु स्वामी दीपांकर जी महाराज मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।  स्वामी दीपांकर महाराज ने हिंदू समाज से जातिगत भेदभाव त्याग कर एकजुट होने और 2026 में जातिवाद को समाप्त करने का आह्वान किया स्वामी जी का मार्गदर्शन इस क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगा।स्वामी दीपंकर जी महाराज ने अपने संबोधन में बांग्लादेश की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां हिंदुओं की हत्याओं के दौरान किसी की जाति नहीं पूछी गई, सभी को केवल उनके धर्म के आधार पर निशाना बनाया गया। उन्होंने चेताया कि यदि हिंदू समाज आपसी भेदभाव में बंटा रहा, तो इसके दुष्परिणाम और गंभीर हो सकते हैं। उनके इस संदेश ने सम्मेलन में उपस्थित जनसमूह को गंभीर चिंतन के लिए प्रेरित किया।उन्होंने महिलाओं से भी समाज को एकजुट करने की मुहिम में आगे आने की अपील की। स्वामी दीपांकर ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में शोभायात्राओं और धार्मिक आयोजनों पर हो रही घटनाएं समाज के लिए चेतावनी हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिंदू समाज को एक मंच पर आना ही होगा।


Details

एक युवा को खोने का दुख कभी कम नहीं हो सकता, लेकिन जब पूरा समाज और नेतृत्व ढाल बनकर खड़ा हो जाए, तो पीड़ित परिवार को संघर्ष करने की शक्ति जरूर मिलती है। कमल ध्यानी जी के दुखद निधन के बाद जिस तरह से महानगर दिल्ली उत्तराखंड प्रवासी संगठन (MDUPS) और सांसद अनिल बलूनी जी ने मिलकर प्रयास किए, वह समाज के प्रति संवेदनशीलता का एक बड़ा उदाहरण है .एक युवा “पहाड़ के लाल” को खोना अपूरणीय क्षति है, लेकिन परिवार को इस कठिन समय में आर्थिक सुरक्षा और नौकरी का संबल मिलना न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम है

5 फरवरी को दिल्ली के जनकपुरी क्षेत्र में दिल्ली जल बोर्ड और ठेकेदार की घोर लापरवाही के कारण ‘पहाड़ के लाल’ कमल ध्यानी (25 वर्ष) का असमय निधन न केवल एक परिवार की क्षति थी, बल्कि पूरे प्रवासी उत्तराखंडी समाज के लिए एक गहरा आघात था।इस अन्याय के खिलाफ महानगर दिल्ली उत्तराखंड प्रवासी संगठन (MDUPS) ने कड़ा रुख अपनाया। 15 फरवरी को हादसे वाली जगह पर किए गए प्रचंड विरोध प्रदर्शन ने सोई हुई व्यवस्था को जगाने का काम किया। इस प्रदर्शन ने दिल्ली सरकार और जल बोर्ड की जवाबदेही तय करने के लिए समाज में एक व्यापक चेतना पैदा की। लगातार जारी संघर्ष के बीच MDUPS के प्रतिनिधिमंडल ने गढ़वाल सांसद और भाजपा के मुख्य प्रवक्ता श्री अनिल बलूनी जी से मुलाकात कर पीड़ित परिवार की व्यथा साझा की।बलूनी जी ने एक ‘सच्चे जननेता’ की भूमिका निभाते हुए इस विषय को अत्यंत गंभीरता से लिया। परिणाम स्वरूप:

त्वरित कार्यवाही: मुलाकात के मात्र 48 घंटों के भीतर पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी का वचन पूरा हुआ।

न्याय की जीत: शब्द नहीं, कर्म बोलता है पीड़ित परिवार को संबल: अनिल बलूनी जी के हस्तक्षेप के मात्र 48 घंटों के भीतर परिवार को आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी का वचन पूरा हुआ।  जननेता की भूमिका: एक सच्चे जननेता की पहचान उनके वादों और उनके क्रियान्वयन से होती है। बलूनी जी ने मुख्यमंत्री के साथ समन्वय कर इसे हकीकत बनाया। यह जीत संगठन की शक्ति और हमारे प्रवासियों की एकजुटता का प्रमाण है। हम दिल्ली जल बोर्ड की लापरवाही को कभी नहीं भूलेंगे, लेकिन हमें संतोष है कि कमल ध्यानी के परिवार को इस कठिन समय में आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा का संबल मिला है।”

शिवाजी नगर, वैशाली में चल रही आध्यात्मिक और सामाजिक जागरण की श्रृंखला अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँच गई है। इस श्रृंखला का छठा और अंतिम भव्य कार्यक्रम आगामी रामप्रस्थ ग्रीन्स, सेक्टर-7, वैशाली में 22 फरवरी को आयोजित होने जा रहा है। इस कार्यक्रम को सफल बनाने और समाज के हर वर्ग की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए व्यापक स्तर पर चर्चा की गई है। हिंदू समाज को संगठित करने, उसमें स्वाभिमान जगाने, और समरसता बढ़ाने के प्रयासों के तहत, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की महत्वपूर्ण पहल “विराट हिंदू सम्मेलन” की तैयारी जोरो से शुरू हुई। रामप्रस्थ ग्रीन्स, सेक्टर-7, वैशाली में 22 फरवरी को होने वाले इस सम्मेलन के आयोजन के लिए कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई।

मुख्य वक्ता एवं अतिथि

इस समापन समारोह की गरिमा बढ़ाने के लिए विश्व प्रसिद्ध सनातनी संत, समाज सुधारक एवं आध्यात्मिक गुरु स्वामी दीपांकर जी महाराज मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहेंगे। अपनी ‘भिक्षाटन’ यात्रा के माध्यम से समाज को एकजुट करने वाले स्वामी जी का मार्गदर्शन इस क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

साथ ही, वैचारिक प्रखरता प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ अधिकारी भी मंच की शोभा बढ़ाएंगे:

श्रीमान देवेंद्र जी: विभाग कार्यवाह, गाजियाबाद विभाग (वक्ता)।

श्रीमान अतुल जी: विभाग प्रचारक, गाजियाबाद विभाग (मुख्य वक्ता)।

इस बैठक में नव-नियुक्त अध्यक्ष, सचिव एवं पूरी कार्यकारिणी टीम के साथ-साथ क्षेत्र के स्थानीय पार्षद और समाज के प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। बैठक के दौरान समाज के प्रत्येक वर्ग की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने और कार्यक्रम को भव्य रूप देने हेतु विस्तृत रणनीति तैयार की गई।

वैशाली (गाजियाबाद) स्थित उत्तराखंड कुमाऊं समाज सेवा समिति ने एक बार फिर सामाजिक दायित्व की मिसाल पेश की है। समिति ने ब्रेन इन्फेक्शन से जूझ रहे 9 वर्षीय बालक चिराग के इलाज के लिए ₹51,000 की आर्थिक सहायता राशि प्रदान कर परिवार को संबल दिया है।

आईसीयू में जीवन की जंग लड़ रहा है चिराग

मूल रूप से अल्मोड़ा (खजुरानी, चौखुटिया) के निवासी चिराग का इलाज फिलहाल दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के आईसीयू में चल रहा है। लंबी बीमारी और भारी मेडिकल खर्च के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति डगमगा गई थी और उनकी सारी जमा-पूंजी समाप्त हो चुकी थी।

संस्था के अध्यक्ष हरीश साह ने बताया कि समिति के सह-अध्यक्ष लक्ष्मण बिष्ट के माध्यम से चिराग की स्थिति की जानकारी मिली थी। जैसे ही यह सूचना समिति के समूह में साझा की गई, सदस्यों ने अपनी सेवा भावना का परिचय दिया। मात्र एक दिन के भीतर छोटी-छोटी राशियों के सहयोग से ₹51,000 का कोष एकत्रित हो गया, जिसे चेक के माध्यम से परिवार को सौंप दिया गया। संस्था का इतिहास गवाह है कि जब भी समाज के किसी व्यक्ति पर संकट आया है, समिति के सदस्यों ने एकजुट होकर मिसाल पेश की है। अध्यक्ष हरीश साह जी एवं समस्त सदस्यों के इस सेवा भाव को नमन।

देशकी राजधानी दिल्ली के जनकपुरी के खुले गड्ढे में हुई कमल ध्यानी की मौत ने लापरवाही और संवेदनहीनता की खौफनाक कहानी उजागर कर दी है. 25 साल का युवक रात में अपने घर लौट रहा था. तभी उसकी बाइक दिल्ली जल बोर्ड के 4.5 मीटर गहरे गड्ढे में जा गिरी. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कमल ध्यानी करीब 8 घंटे तक उसी गड्ढे में पड़े रहे. इस दौरान कम से कम 5 लोगों को हादसे की जानकारी थी. लेकिन किसी ने पुलिस या प्रशासन को सूचना देना जरूरी नहीं समझा. यह देरी कमल की जिंदगी पर भारी पड़ गई. जनकपुरी में कमल की मौत के मामले में द्वारका जिला अदालत ने दिल्ली पुलिस को 13 फरवरी तक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। महानगर दिल्ली उत्तराखंड प्रवासी संगठन (MDUPS) के अध्यक्ष कमल ध्यानी ने बुधवार को घटनास्थल का औचक निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।

जनकपुरी स्थित सरदार जोगिंदर सिंह मार्ग पर दिल्ली जल बोर्ड द्वारा खोदे गए मौत के गड्ढे में गिरकर हमारे पहाड़ के 25 वर्षीय युवा स्वर्गीय कमल ध्यानी की मृत्यु हो गई। यह दिल्ली जल बोर्ड और सरकार की भयावहता का नतीजा है जिसमें हमारे पहाड़ का युवा काल कवलित हो गया और सरकार की असंवेदनशीलता ,अनदेखी और दोषियों को बचाने की जो लिपापोती चल रही है उससे कमल ध्यानी का परिवार अत्यधिक निराश है संगठन के अध्यक्ष कमल ध्यानी बताया कि रविवार सुबह 11 बजे घटनास्थल पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न उत्तराखंड सामाजिक एवं वेलफेयर संगठनों के लोग एकजुट होकर शामिल होंगे। प्रदर्शन में अधिकाधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पहाड़ी बाहुल्य क्षेत्रों में बैनर-पोस्टर के माध्यम से जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।

“जहाँ चाह, वहाँ राह… और जहाँ नेक इरादा हो, वहाँ समान विचारधारा वाले ढेरों लोग साथ जुड़ ही जाते हैं! 22 जनवरी 2026 दोपहर 3:00 से 5:00 बजे के बीच हिंडन नदी के तट पर एक विशाल सफाई अभियान चलाया गया। इस अभियान की सबसे खास बात विभिन्न संस्थाओं और नागरिकों का एक साथ आना रही। 2 घंटों के भीतर नदी से लगभग 300 किलो अजैविक कचरा (non-biodegradable waste) और पूजन सामग्री निकाली गई।इस नेक कार्य के लिए लगभग 100 लोग स्वेच्छा से आगे आए और श्रमदान किया।स अभियान को सफल बनाने में निम्नलिखित संस्थाओं ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया: होप फाउंडेशन गाजियाबाद में नदी के घाटों की सफाई और प्लास्टिक कचरा प्रबंधन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

‘हिंडन मित्र’ अभियान: 22 जनवरी के फाउंडेशन ने स्थानीय स्कूलों के साथ मिलकर छात्रों को ‘हिंडन मित्र’ के रूप में प्रशिक्षित किया है, जो अपने-अपने क्षेत्रों में नदी प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता फैला रहे हैं। डॉ. असित खन्ना (Dr. Asit Khanna) गाजियाबाद के एक अत्यंत प्रतिष्ठित कार्डियोलॉजिस्ट (हृदय रोग विशेषज्ञ) हैं, जो न केवल चिकित्सा के क्षेत्र में बल्कि हिंडन नदी के पुनरुद्धार और सामाजिक कार्यों में भी एक प्रमुख चेहरा हैं

प्लास्टिक से बेंचेस: फाउंडेशन का एक अनोखा अभियान है जिसमें लोग प्लास्टिक दान करते हैं और उसके बदले फाउंडेशन उन्हें रिसाइकल्ड प्लास्टिक से बनी बेंचेस प्रदान करता है। यह मॉडल जनवरी 2026 में हिंडन किनारे की बस्तियों में कचरा कम करने के लिए प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है।

HOPE Foundation: जन-भागीदारी और स्वच्छता

Gram Niyojan Kendra (ग्राम नियोजन केंद्र)

GMA (गाजियाबाद मैनेजमेंट एसोसिएशन)

IMA (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन)

Shriram Pistons & Rings Ltd.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में हुआ आयोजन

  • उपस्थित श्रद्धालुओं को मिला जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी यतीन्द्र आनन्द गिरी जी महाराज और प्रेमेश्वर पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी सतीशाचार्य जी महाराज का सानिध्य
  • श्रीमान आनन्द जी (प्रांत सह प्रचारक, मेरठ प्रांत, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) श्रीमान श्रीकांत जी (महानगर कार्यवाह, वैशाली महानगर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) ने किया संबोधित

18 जनवरी, 2026,
वैशाली, गाजियाबाद हिंदू समाज की एकता, बंधुत्व, एवं स्वाभिमान को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में 18 जनवरी, 2026 (रविवार) को गाजियाबाद के वैशाली, सेक्टर-5 में ‘विराट हिन्दू सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। सम्मेलन में उपस्थित श्रद्धालुओं को श्री स्वामी यतीन्द्र आनन्द गिरी जी महाराज, महामंडलेश्वर, जूना अखाड़ा और अनंत श्री विभूषित जगदगुरु रामानंदाचार्य प्रेमेश्वर पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी सतीशाचार्य जी महाराज का सानिध्य प्राप्त हुआ। उपस्थित जनों को श्रीमान आनन्द जी (प्रांत सह प्रचारक, मेरठ प्रांत, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) श्रीमान श्रीकांत जी (महानगर कार्यवाह, वैशाली महानगर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) ने संबोधित किया।

इस अवसर पर, आरएसएस के वक्ताओं ने हिन्दू समाज से पांच संकल्पों को अपनाने का आह्वान किया: सामाजिक समरसता, पर्यावरण एवं जल संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, स्व आधारित जीवन, और नागरिक कर्तव्यबोध। उन्होंने समाज के लोगों से भारतीय संस्कृति और संस्कारों को अपने जीवन में शामिल करने की अपील की और जातीय भेदभाव को समाप्त करके समाज में एकता स्थापित करने पर जोर दिया।

⁠विराट हिंदू सम्मेलन के लिए सुबह साढ़े नौ बजे एक भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। यात्रा कामना मंदिर परिसर से गाजेबाजे और सजी-धजी बग्घी के साथ शुरू हुई और वैशाली के विभिन्न मार्गों से होते हुए सम्मेलन स्थल पर पहुंची। गणेश वन्दना से शुरू हुए मुख्य आयोजन में बच्चों के कई रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल थे। इसमें लव जिहाद पर एक लघु नाटिका भी शामिल थी। इस कार्यक्रम में स्थानीय पार्षद के साथ-साथ समाज के कई गणमान्य लोग भी उपस्थित थे। विराट हिन्दू सम्मेलन का समापन समरसता भोज के साथ हुआ

उत्तराखण्ड का लोकपर्व घुघुतिया त्योहार, उत्तरैणी और मकर संक्रांति पर्व के उपलक्ष में उत्तराखण्ड धरोहर संरक्षण समिति (पंजी०), वैशाली, गाज़ियाबाद के पदाधिकारियों ने 14/01/2026 बुधवार की रात को कड़कड़ाती ठंड से बचाने के लिए लाचार, असहाय व गरीबों को कंबल वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया।

संस्था के पदाधिकारियों ने दिल्ली में एम्स, सफदरजंग, राम मनोहर लोहिया अस्पतालों के बाहर और बस स्टैंड पर, सड़क के किनारे पटरियों पर सोते हुए जिन्हें वास्तविक में कंबल की जरूरत थी उन्हें ढूंढ ढूंढ कर दिया गया।

उत्तराखण्ड धरोहर संरक्षण समिति (पंजी०) धर्म और जाति बंधन से दूर हटकर गरीबों और असहाय लोगों की हर संभव मदद करती है।

इस मुहिम में अध्यक्ष श्री मदन सिंह बिष्ट, उपाध्यक्ष श्री मोहन सिंह बिष्ट, महासचिव श्रीमती सविता गुसाईं, सचिव श्री गोपाल सिंह धामी, सह कोषाध्यक्ष श्री धीरेन्द्र बर्त्वाल, सलाहकार डॉ रामेश्वरी नादान, सांस्कृतिक सह सचिव श्रीमती शशि पाठक, सलाहकार श्री अलक्षेन्द्र सिंह नेगी, सलाहकार श्री राजेन्द्र डालाकोटी, सलाहकार श्री महेंद्र सिंह देउपा, सेक्टर प्रभारी श्री हेम चन्द्र बधानी एवं सेक्टर प्रभारी श्री मोहन चंद्र पंत जी मौजूद रहे।

देवभूमि उत्तराखंड के रामनगर का यह नायाब हीरा, मुकेश सुयाल, आज उन हजारों युवाओं के लिए रोल मॉडल है जो समाज सेवा करना चाहते हैं। उनका कार्य यह याद दिलाता है कि दुआएं कमाने के लिए किसी पद की नहीं, बस एक साफ दिल की जरूरत होती है।मुकेश सुयाल जी जैसे लोग समाज के वे स्तंभ हैं, जो बिना किसी शोर-शराबे के चुपचाप मानवता की सेवा में जुटे रहते हैं। रामनगर की सुंदर वादियों के बीच उनकी इस नेकदिली की चर्चा अब हर जुबान पर है। मुकेश जी ने उन बच्चियों को केवल ईंट-पत्थरों का मकान नहीं दिया, बल्कि उन्हें “भयमुक्त भविष्य” और “आत्मसम्मान” उपहार में दिया है। रामनगर और पूरी देवभूमि को अपने इस बेटे पर गर्व होना चाहिए।

मुकेश सुयाल: रामनगर का वह ‘नायाब हीरा’ जिसने इंसानियत को मजहब से ऊपर रखा

मुकेश सुयाल। रामनगर के इस व्यक्तित्व ने यह सिद्ध कर दिया है कि दुआएं कमाने के लिए किसी ऊंचे पद या सत्ता की नहीं, बल्कि एक साफ़ दिल और अटूट संकल्प की जरूरत होती है।

मरते पिता का वचन

इंसानियत की सबसे भावुक मिसाल तब देखने को मिली जब एक बेबस पिता ने अपनी अंतिम सांसें गिनते हुए मुकेश भाई का हाथ थामा और अपनी बेटियों का भविष्य उन्हें सौंप दिया। उस पिता ने कहा था— “मुकेश भाई, मेरी बच्चियों को अकेला मत छोड़ना, उनके लिए एक घर बना देना।”

जहाँ दुनिया वादे करके भूल जाती है, वहीं मुकेश सुयाल ने इस वचन को किसी पवित्र अनुष्ठान की तरह लिया। टूटी-फूटी झोपड़ी में रहने वाली उन बिन माँ-बाप की बच्चियों के लिए मुकेश जी ने रात-दिन एक कर दिया और मात्र १० दिनों के भीतर एक पक्का घर तैयार कर खड़ा कर दिया। जब वे बच्चियां पहली बार उस चौखट के अंदर गईं, तो उनकी आँखों से बहते आंसू इस बात के गवाह थे कि अब वे इस दुनिया में अनाथ नहीं हैं। मुकेश जी ने उन्हें केवल छत नहीं दी, बल्कि एक “भयमुक्त भविष्य” और “आत्मसम्मान” उपहार में दिया।

मृत्यु के बाद का सम्मान: मजहब से ऊपर इंसानियत

आज के दौर में जहाँ समाज अक्सर धर्म और दीवारों में बंटा नजर आता है, वहाँ मुकेश सुयाल साम्प्रदायिक सौहार्द की एक जीवंत मिसाल पेश कर रहे हैं। वे केवल जीवित लोगों के मददगार नहीं हैं, बल्कि वे उन लावारिस मृत आत्माओं के भी रक्षक हैं जिनका इस दुनिया में कोई नहीं बचा।

मुकेश जी लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार उनके धर्म के अनुसार करते हैं। यदि मृतक हिंदू है, तो वे पूरे विधि-विधान से मुखाग्नि देते हैं और यदि मुस्लिम है, तो पूरी शिद्दत के साथ उन्हें सुपुर्द-ए-खाक (दफन) करते हैं। यह कार्य हर इंसान को मरने के बाद सम्मान पाने का अधिकार सुनिश्चित करता है।

मुकेश सुयाल जी की समाज सेवा किसी एक दायरे में सीमित नहीं है, बल्कि वे एक ‘सर्वांगीण सेवा’ के मिशन पर हैं:

  1. स्वास्थ्य (Health): अस्पतालों में सुबह-शाम मरीजों की तीमारदारी करना और गरीब परिवारों के लिए दवाओं का प्रबंध करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है।
  2. आवास (Shelter): बेसहारा लोगों के सिर पर सुरक्षित छत बनाना।
  3. बुनियादी जरूरतें (Basics): जरूरतमंदों तक समय पर भोजन और वस्त्र पहुँचाना।
  4. अंतिम विदाई (Dignity): लावारिस देह को ससम्मान विदाई देना।

युवाओं के लिए रोल मॉडल

बिना किसी शोर-शराबे और तामझाम के चुपचाप सेवा में जुटे मुकेश सुयाल आज उत्तराखंड के हजारों युवाओं के लिए एक ‘रोल मॉडल’ बन चुके हैं। उनका जीवन सिखाता है कि समाज सेवा केवल धन से नहीं, बल्कि शारीरिक श्रम और संवेदना से होती है। रामनगर और पूरी देवभूमि को अपने इस बेटे पर गर्व है।


मदद करने का जज्बा रखिए, रास्ते अपने आप बन जाएंगे

जीते जी तो सब अपनों की सेवा करते हैं, असली इंसान वही जो गैरों की मैयत को कंधा दे जाए और अनाथों का हाथ थाम ले।


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