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दूसरे राज्यों से पौधे लाने से लेकर पहाड़ में ही उन्नत पौध तैयार करने की ओर

मन्नू धामी की कृषि नवाचार और स्वरोजगार की प्रेरणादायक कहानी

मन्नू धामी | ग्राम द्वलिसेरा, विकासखंड कनालीछीना, जनपद पिथौरागढ़

उत्तराखंड के पहाड़ों में स्वरोजगार की संभावनाओं को तलाशते हुए मन्नू धामी पिछले पांच वर्षों से अपने गांव में रहकर फल उत्पादन, कृषि नवाचार और मत्स्य पालन के क्षेत्र में निरंतर नए प्रयोग कर रहे हैं। उनका प्रयास केवल अपनी आजीविका तक सीमित नहीं है, बल्कि पहाड़ में नई फल किस्मों को बढ़ावा देने और भविष्य में स्थानीय स्तर पर उन्नत पौध उपलब्ध कराने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।

आज मन्नू धामी 135 से अधिक देशी-विदेशी आम की किस्मों तथा 300 से अधिक विभिन्न फल किस्मों पर काम कर रहे हैं। सीमित कृषि भूमि वाले पर्वतीय क्षेत्रों में इतनी अधिक फल विविधता को विकसित करना अपने आप में एक प्रयोग है।

दूसरे राज्यों से पौधे लाने की जरूरत कम करने का लक्ष्य

मन्नू धामी बताते हैं कि वर्तमान में कई कीमती और उन्नत फल पौधों के लिए उन्हें भारत के अलग-अलग राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है। उनका लक्ष्य है कि आने वाले समय में विदेशी और उन्नत फल किस्मों की गुणवत्तापूर्ण पौध उत्तराखंड में ही तैयार की जा सके, ताकि पहाड़ के किसानों को नई किस्मों के पौधों के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े।

उनकी सोच स्पष्ट है—

“आज हम दूसरे राज्यों से पौधे लेकर आ रहे हैं, कल पहाड़ में ही उन्नत पौध तैयार करके दूसरों तक पहुंचाएंगे।”

यह पहल भविष्य में स्थानीय किसानों, बागवानों और युवाओं के लिए नई संभावनाएं पैदा कर सकती है।

विदेशी फल किस्मों का पहाड़ में परीक्षण

मन्नू धामी के यहां कई नई और उन्नत फल प्रजातियों का ट्रायल भी चल रहा है। इनमें—

  • लोगान (Longan) की 4 किस्में
  • मैकेडामिया नट (Macadamia Nut)
  • रामबुटान (Rambutan)
  • एवोकाडो (Avocado)

मन्नू धामी के अनुसार इन प्रजातियों के परीक्षण में अब तक अच्छे और उत्साहजनक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। हालांकि इन फसलों की स्थानीय जलवायु में दीर्घकालिक सफलता और व्यावसायिक संभावनाओं का आकलन लगातार परीक्षण और वैज्ञानिक निगरानी के आधार पर किया जाना जरूरी है।

कम जमीन, ज्यादा किस्में—नवाचार की नई सोच

पर्वतीय क्षेत्रों में खेती की एक बड़ी चुनौती सीमित कृषि भूमि है। बहुत से किसान नई-नई फल किस्में लगाना चाहते हैं, लेकिन जमीन कम होने के कारण वे प्रत्येक किस्म के लिए अलग-अलग पेड़ नहीं लगा पाते।

मन्नू धामी ने इसी समस्या को एक अवसर के रूप में देखा।

उनका प्रयास है कि एक ही पेड़ पर कई अलग-अलग किस्मों को विकसित करके कम जगह में अधिक फल विविधता उपलब्ध कराई जा सके।

एक पेड़ पर 7 प्रकार के अमरूद

मन्नू धामी ने एक ही पेड़ पर 7 अलग-अलग प्रकार के अमरूद की किस्में तैयार की हैं, जो वर्तमान में फल भी दे रहा है।

यह प्रयोग सीमित भूमि वाले किसानों के लिए एक नई संभावना प्रस्तुत करता है। यदि एक ही पेड़ पर कई किस्मों को सफलतापूर्वक विकसित किया जा सके, तो छोटी जमीन में भी फल विविधता को बढ़ाया जा सकता है।

एक पेड़ पर 4 बौनी आम की किस्में

इसी दिशा में मन्नू धामी ने एक ही पेड़ पर आम की 4 बौनी किस्मों को भी विकसित किया है।

उनका उद्देश्य ऐसी बहुकिस्मीय संरचना तैयार करना है, जिसमें एक ही पेड़ की अलग-अलग शाखाओं पर अलग-अलग किस्मों के आम लग सकें। इन किस्मों में अलग-अलग रंग, स्वाद और विशेषताएं देखने को मिल सकती हैं।

यह प्रयोग अभी विकास और परीक्षण के चरण में है, लेकिन सफल होने पर यह कम जमीन वाले किसानों के लिए फल विविधता का एक रोचक मॉडल बन सकता है।

फल उत्पादन के साथ मत्स्य पालन

मन्नू धामी ने स्वरोजगार के लिए केवल फल उत्पादन पर निर्भर रहने के बजाय मत्स्य पालन को भी अपने मॉडल का हिस्सा बनाया है।

वर्तमान में उनके यहां 5 टैंकों में मछली पालन किया जा रहा है, जबकि 7 अतिरिक्त टैंकों का कार्य प्रगति पर है।

इस तरह फल उत्पादन और मत्स्य पालन को साथ लेकर वह ग्रामीण क्षेत्र में बहुआयामी स्वरोजगार मॉडल विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

पहाड़ में रोजगार की संभावनाएं पैदा करने की सोच

मन्नू धामी का प्रयास यह दिखाता है कि पहाड़ में सीमित संसाधनों के बावजूद यदि सोच में नवाचार हो, तो स्वरोजगार के नए रास्ते बनाए जा सकते हैं।

उनकी कोशिश है कि पहाड़ के किसानों को—

नई फल किस्में,
उन्नत पौध,
बहुकिस्मीय पौध तैयार करने की तकनीक
और स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर

उपलब्ध हो सकें।

उनका सपना केवल अपने बगीचे तक सीमित नहीं है। वह चाहते हैं कि भविष्य में उनके प्रयोगों से तैयार पौध और अनुभव दूसरे किसानों तक भी पहुंचे।

जमीन कम है तो सोच बड़ी होनी चाहिए

मन्नू धामी की कहानी एक महत्वपूर्ण संदेश देती है—

“कम जमीन का मतलब कम अवसर नहीं है। नई तकनीक, प्रयोग और सही योजना के साथ छोटी जमीन पर भी विविधता और स्वरोजगार के नए रास्ते बनाए जा सकते हैं।”

उनका यह प्रयास “एक कदम पहाड़ की ओर” की उस सोच से जुड़ता है, जिसमें पहाड़ की जमीन, पहाड़ के संसाधन और पहाड़ की युवा शक्ति को जोड़कर स्वरोजगार से स्वावलंबन की ओर बढ़ने का लक्ष्य है।

आज पौधे बाहर से, कल पौध पहाड़ से

मन्नू धामी के प्रयास का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उनका भविष्य का लक्ष्य है।

आज उत्तराखंड के किसान नई और उन्नत किस्मों के पौधों के लिए दूसरे राज्यों की ओर देखते हैं।
कल यही पहाड़ उन्नत पौध तैयार कर दूसरे किसानों तक पहुंचाने की क्षमता विकसित करे—यही मन्नू धामी का सपना है।

यदि उनके प्रयोग वैज्ञानिक परीक्षण, स्थानीय जलवायु के अनुकूलन और गुणवत्तापूर्ण पौध उत्पादन के साथ आगे बढ़ते हैं, तो यह पहल भविष्य में पर्वतीय कृषि और बागवानी के क्षेत्र में एक उपयोगी उदाहरण बन सकती है।

एक कदम पहाड़ की ओर

“पहाड़ की जमीन पर नवाचार, गांव में रोजगार,
स्थानीय स्तर पर उन्नत पौध— और स्वरोजगार से स्वावलंबन।”

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