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उत्तराखंड के पहाड़ों से पलायन आज एक बड़ी चुनौती बन चुका है, लेकिन इसी देवभूमि के कुछ जाबांज युवा ऐसे भी हैं जो “एक कदम पहाड़ की ओर” बढ़ाते हुए न सिर्फ वापस अपनी जड़ों की तरफ लौट रहे हैं, बल्कि स्थानीय संसाधनों को रोजगार का जरिया बनाकर दूसरों के लिए भी मिसाल पेश कर रहे हैं।

ऐसी ही एक बेहद प्रेरणादायक कहानी है अल्मोड़ा के पेटशाल गाँव के रहने वाले दीपक पेटशाली की, जिन्होंने पहाड़ों की अनमोल जड़ी-बूटियों और पारंपरिक स्वाद को समेटकर ‘BNK Herbal Tea’ नाम से एक शुद्ध, हैंडमेड और इको-फ्रेंडली ब्रांड की नींव रखी है।

गाँव की पगडंडियों से सिडकुल और फिर वापस ‘पहाड़ की ओर’

दीपक पेटशाली की शुरुआती पढ़ाई गाँव के ही सरकारी स्कूल से हुई और इंटरमीडिएट की परीक्षा उन्होंने GIC अल्मोड़ा से उत्तीर्ण की। उत्तराखंड के आम युवाओं की तरह वे भी रोजगार की तलाश में मैदान की तरफ गए और सिडकुल (Sidcul) रुद्रपुर में FMCG सेक्टर के साथ-साथ कई अन्य कंपनियों में काम किया।

लेकिन दिल हमेशा पहाड़ के लिए ही धड़कता था। अपनी माटी के कर्ज को चुकाने और कुछ अलग करने की चाहत उन्हें वापस अल्मोड़ा खींच लाई। यहाँ आकर उन्होंने एक सामाजिक संस्था (NGO) में लगातार 8 वर्षों तक काम किया। इसी सामाजिक जुड़ाव ने उन्हें पहाड़ों की असली ताकत और स्थानीय समस्याओं को करीब से समझने का मौका दिया।

एक प्याली चाय से मिला जीवन का सबसे बड़ा बिज़नेस आइडिया

हते हैं कि अगर नीयत साफ हो, तो रास्ते अपने आप बन जाते हैं। NGO में काम करने के दौरान दीपक अक्सर अपने साथियों को पहाड़ों की प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से बनी अलग-अलग तरह की चाय बनाकर पिलाया करते थे। उनके हाथ की चाय की खुशबू और औषधीय गुणों का हर कोई कायल था। सहकर्मियों और दोस्तों ने बार-बार एक ही बात कही— “दीपक, इस काम में जादू है। तुम्हें इसे बड़े स्तर पर शुरू करना चाहिए।”

यहीं से दीपक को एक ऐसा व्यवसाय शुरू करने का विचार आया जो पूरी तरह से प्रकृति से जुड़ा हो और समाज को स्वस्थ बनाए। इस तरह 08 अक्टूबर 2023 को जन्म हुआ ‘BNK HERBAL TEA’ ब्रांड का।

“मेरा काम ही मेरी पहचान है, और प्रकृति से मेरा अनन्य प्रेम ही इस बिज़नेस की असली ताकत है।” — दीपक पेटशाली

100% हैंडमेड: मशीनों से दूर, शुद्धता के पास

बाजार में मिलने वाली चाय पत्तियों और केमिकल्स से दूर, BNK Herbal Tea की सबसे बड़ी खूबी इसका 100% हैंडमेड होना है। पहाड़ों की पारंपरिक पद्धतियों को जिंदा रखते हुए, बिना किसी मशीन के प्रयोग के इन हर्बल चाय को तैयार किया जाता है।

शुरुआत सिर्फ उत्तराखंड के प्रसिद्ध जंगली फल काफल से बनी ‘काफल हर्बल टी’ से हुई थी, लेकिन आज दीपक के पास 7 लाजवाब प्रोडक्ट्स की श्रृंखला उपलब्ध है:

हविशेष उत्पाद (50 ग्राम ग्लास जार और 40 ग्राम पाउच में उपलब्ध):

  • 5 प्रकार की प्रीमियम हर्बल चाय:
    1. Kafal Herbal Tea (काफल हर्बल टी)
    2. Mint Herbal Tea (पुदीना हर्बल टी)
    3. Buransh Herbal Tea (बुरांश हर्बल टी – राज्य पुष्प की खूबियों से भरपूर)
    4. Tulsi-Ginger Tea (तुलसी-अदरक हर्बल चाय)
    5. Nettle Herbal Tea (कंडाली/बिच्छू घास की चाय – स्वास्थ्य के लिए अमृत)
    6. Thyme Herbal Tea (जंगली अजवाइन/थाइम चाय)
    7. Himalayan Tulsi Lemongrass Tea (तुलसी लेमनग्रास चाय)
  • 2 प्रकार के विशेष चाय मसाले:
    • Chai Masala (Milk): दूध वाली चाय के शौकीनों के लिए औषधीय तड़का।
    • Chai Masala Black & Herbal Tea: ब्लैक टी और काढ़े के लिए सबसे बेहतरीन मसाला।

देश के कोने-कोने तक पहाड़ों की खुशबू

आज BNK Herbal Tea न केवल उत्तराखंड, बल्कि पूरे देश में अपनी पहचान बना रही है। दीपक ने अपने उत्पादों को डिजिटल और ऑफलाइन दोनों ही तरीकों से बाजार में उतारा है:

  • ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स: अमेज़न (Amazon), मीशो (Meesho), और उत्तराखंड की पारंपरिक धरोहर को बढ़ावा देने वाले मंच ‘उत्तराखंड हाट’ (Uttarakhand Haat) पर ये उत्पाद आसानी से ऑर्डर किए जा सकते हैं।
  • ऑफलाइन नेटवर्क: स्थानीय आउटलेट्स, पहाड़ों के खूबसूरत कैफ़े, होटल्स, मिनी मार्ट और खासकर ‘होम स्टे’ के माध्यम से पर्यटकों तक देवभूमि का यह असली स्वाद पहुँचाया जा रहा है

स्वरोजगार से स्वावलंबन की मिसाल

दीपक पेटशाली की यह यात्रा केवल एक सफल व्यवसाय की कहानी नहीं, बल्कि स्थानीय संसाधनों से आत्मनिर्भर उत्तराखंड बनाने की प्रेरणा है। उन्होंने यह साबित किया है कि यदि युवा अपने गाँव लौटकर स्थानीय उत्पादों को पहचान दें, तो पलायन जैसी चुनौती का समाधान भी संभव है।

“हमें नौकरी ढूंढने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनना होगा। जब हम अपनी माटी के संसाधनों का सम्मान करेंगे और स्वयं उद्यम शुरू करेंगे, तभी हमारे पहाड़ आबाद रहेंगे। प्रकृति और समाज—दोनों को आत्मनिर्भर बनाना हमारी जिम्मेदारी है।”

यही है — “एक कदम पहाड़ की ओर”।

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