उत्तराखंड की वीरभूमि ने देश को अनगिनत जांबाज सैनिक दिए हैं। उन्हीं वीर सपूतों में से एक थे हवलदार चंद्रमोहन सिंह रावत, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका साहस, कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेंगे।
प्रारंभिक जीवन
हवलदार चंद्रमोहन सिंह रावत का जन्म उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जनपद के नैनीडांडा ब्लॉक के डांडातोली क्षेत्र स्थित कुकलियाल गांव में हुआ था। पहाड़ की सादगी, संस्कार और देशसेवा की भावना उनके व्यक्तित्व में बचपन से ही दिखाई देती थी। बाद में उनका परिवार नंदग्राम, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) में रहने लगा, जहां उनका वर्तमान निवास था।
शहादत की घटना
6 जुलाई को मणिपुर के उखरुल जिले में असम राइफल्स का एक सैन्य काफिला नियमित अभियान से लौट रहा था। इसी दौरान घात लगाए बैठे उग्रवादियों ने अचानक काफिले पर गोलीबारी और विस्फोटक हमला कर दिया।
इस भीषण हमले में हवलदार चंद्रमोहन सिंह रावत ने अदम्य साहस और वीरता का परिचय देते हुए अपने साथियों और देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी शहादत ने पूरे देश को गर्व और शोक दोनों से भर दिया।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
हवलदार चंद्रमोहन सिंह रावत के परिवार पर यह दुख असहनीय था। शहादत से लगभग 35 दिन पहले उनके पिता का निधन हो गया था। पिता के अंतिम संस्कार और परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के बाद वे पुनः अपनी ड्यूटी पर लौटे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
ड्यूटी पर लौटने के अगले ही दिन, 6 जुलाई को मणिपुर में हुए उग्रवादी हमले में वे वीरगति को प्राप्त हो गए। महज 35 दिनों के भीतर परिवार ने पहले पिता और फिर अपने सबसे मजबूत सहारे को खो दिया।
वे अपने पीछे पत्नी श्रीमती मंजू देवी रावत, पुत्र राहुल सिंह रावत, तथा पुत्रियां रितिका रावत और यशिका रावत को छोड़ गए हैं।
अंतिम विदाई
जब उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर गाजियाबाद स्थित उनके आवास पहुंचा, तो अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई और लोगों ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इसके बाद हिंडन घाट पर पूरे सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। सेना के जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी और राष्ट्र ने अपने एक वीर सपूत को अश्रुपूर्ण विदाई दी।
हवलदार चंद्रमोहन सिंह रावत का बलिदान सदैव अमर रहेगा। उनका जीवन हमें सिखाता है कि मातृभूमि की रक्षा से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। पूरा उत्तराखंड और पूरा देश इस वीर सपूत को शत-शत नमन करता है।
विनम्र श्रद्धांजलि।
जय हिंद। 🇮🇳




