वैशाली गाजियाबाद : मानवता और संगठन की शक्ति तब और अधिक निखर कर आती है जब कोई अपना संकट में हो। कुछ ऐसा ही उदाहरण पेश किया है ‘उत्तराखण्ड धरोहर संरक्षण समिति (पंजी०)’ ने। समिति के एक सक्रिय सदस्य , जो वर्तमान में एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, की मदद के लिए पूरी समिति एक परिवार की तरह खड़ी हो गई है।
संकट की घड़ी में ‘सेवा परमो धर्म:’ का संकल्प
सक्रिय सदस्य की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति और कमजोर आर्थिक स्थिति की जानकारी मिलते ही समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने बिना समय गंवाए आर्थिक सहायता का बीड़ा उठाया। ‘सेवा परमो धर्म:’ के अपने मूल मंत्र को ध्येय मानकर, समिति के सदस्यों ने स्वेच्छा से योगदान दिया, जिससे एक महत्वपूर्ण धनराशि एकत्रित हुई।
₹50,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की गई
समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने सक्रिय सदस्य के निवास पर जाकर उनसे और उनके परिवार से मुलाकात की। इस दौरान उपचार हेतु ₹50,000 (पचास हजार रुपए) का चेक उन्हें सौंपा गया। समिति के इस प्रयास से न केवल परिवार को आर्थिक संबल मिला है, बल्कि इस कठिन समय में उनका मानसिक मनोबल भी बढ़ा है।

“यह सहायता केवल एक धनराशि नहीं है, बल्कि हमारे संगठन की एकता और एक-दूसरे के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है। हम ईश्वर से शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हैं।” — समिति पदाधिकारी
समिति ने जताया आभार
उत्तराखण्ड धरोहर संरक्षण समिति ने अपने सभी सदस्यों का कोटि-कोटि आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने इस संवेदनशील परिस्थिति में उदारता दिखाते हुए अपना योगदान दिया। समिति ने आशा व्यक्त की है कि भविष्य में भी समाज और संगठन के हित के लिए सभी सदस्य इसी प्रकार कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करते रहेंगे।





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