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आज के दौर में जब युवा केवल पारंपरिक नौकरियों के पीछे भाग रहे हैं, उत्तराखंड की साक्षी बेलवाल जैसी आत्मनिर्भर और रचनात्मक उद्यमी समाज में एक नई मिसाल पेश कर रही हैं। शिक्षा और रचनात्मकता के अनूठे संगम से उन्होंने न केवल अपना एक अलग रास्ता चुना, बल्कि आज वे ‘Divadangles’ ब्रांड के जरिए हस्तशिल्प और महिला सशक्तिकरण को एक नई दिशा दे रही हैं।

शिक्षा और रचनात्मकता का एक अनूठा संगम

साक्षी बेलवाल की शैक्षणिक पृष्ठभूमि आम उद्यमियों से काफी अलग और समृद्ध है। उन्होंने समाजशास्त्र (Sociology) और इंटीरियर डिजाइनिंग में मास्टर डिग्री हासिल की है। समाजशास्त्र की पढ़ाई ने जहाँ उन्हें समाज और मानवीय संवेदनाओं को गहराई से समझने में मदद की, वहीं इंटीरियर डिजाइनिंग ने उनके भीतर छिपी रचनात्मकता, रंगों के चयन और सौंदर्यशास्त्र (aesthetics) को निखारा। अपनी इसी समझ को उन्होंने अपनी कला में पिरोया और जन्म हुआ ‘Divadangles’ का।

क्या है ‘Divadangles’?

Divadangles एक प्रीमियम हैंडमेड क्रोशिया (crochet) ब्रांड है, जो रचनात्मकता, भव्यता और भावनाओं को धागों के माध्यम से एक नया रूप देता है। यह ब्रांड केवल उत्पाद नहीं बेचता, बल्कि हर उत्पाद के साथ एक कहानी और अपनापन जोड़ता है। यहाँ हर एक पीस को मशीन से नहीं, बल्कि हाथों से बेहद प्यार, देखभाल और बारीकी के साथ तैयार किया जाता है, जो इसे मशीनी दौर में भी बेहद खास और टिकाऊ बनाता है।

इस ब्रांड के तहत कई तरह के आकर्षक प्रोडक्ट्स तैयार किए जाते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • स्टाइलिश फैशन एक्सेसरीज: हाथ से बुने हुए बेहद खूबसूरत क्रोशिया बैग्स, पर्स और ट्रेंडी क्लच।
  • होम एंड लाइफस्टाइल: घर की खूबसूरती बढ़ाने वाले आकर्षक डेकोर आइटम्स और सदाबहार क्रोशिया के फूल।
  • विशेष उपहार (Customized Gifts): नवजात शिशुओं के लिए सुरक्षित और आरामदायक प्रोडक्ट्स और ग्राहकों की पसंद के अनुसार तैयार किए गए कस्टमाइज्ड गिफ्ट्स।

सिर्फ बिजनेस नहीं, महिला सशक्तिकरण की एक मुहिम

साक्षी का दृष्टिकोण केवल एक सफल बिजनेस खड़ा करने तक सीमित नहीं है। उनका असली विजन समाज की उन महिलाओं को आगे लाना है जो आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं। ‘Divadangles’ के माध्यम से वे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को क्रोशिया बुनाई का विशेष प्रशिक्षण दे रही हैं।

इस पहल के जरिए वे:

  1. उद्यमिता को बढ़ावा: महिलाओं में खुद का काम शुरू करने का आत्मविश्वास जगा रही हैं।
  2. स्थायी आजीविका: महिलाओं को घर बैठे आत्मनिर्भर बनने और सम्मानजनक कमाई करने के अवसर दे रही हैं।
  3. सांस्कृतिक संरक्षण: आधुनिक दौर में लुप्त हो रही पारंपरिक हस्तशिल्प कला को पुनर्जीवित कर रही हैं।

निष्कर्ष: पहाड़ों से प्रेरणा लेता एक सफर

साक्षी बेलवाल और उनका ब्रांड ‘Divadangles’ इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि आपके पास सही दृष्टिकोण, अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान और कुछ करने का जज्बा हो, तो आपकी शिक्षा और हुनर मिलकर समाज में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

साक्षी न केवल अपनी कला को सहेज रही हैं, बल्कि कई अन्य महिलाओं के जीवन में भी आत्मनिर्भरता का उजियारा फैला रही हैं। उनकी यह यात्रा हर उस युवा के लिए एक महान प्रेरणा है जो अपनी जड़ों, अपने ‘पहाड़’ और अपनी संस्कृति से जुड़कर समाज के लिए कुछ नया और सार्थक करने का सपना देखता है।

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