राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आज वैशाली महानगर में ‘सामाजिक सद्भाव बैठक’ का गरिमामय आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस बैठक में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और राष्ट्र की एकता व अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखने का संकल्प लिया।
मुख्य वक्ता का संबोधन
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मेरठ प्रान्त के बौद्धिक प्रमुख श्रीमान् कृष्ण कुमार जी ने अपने मुख्य संबोधन में सामाजिक समरसता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि:
“संघ के १०० वर्ष पूर्ण होने के इस ऐतिहासिक अवसर पर हमारा लक्ष्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना है जहाँ कोई भेदभाव न हो। सामाजिक सद्भाव केवल एक विचार नहीं, बल्कि हमारे जीवन का आचरण होना चाहिए। जब समाज एकजुट होता है, तभी राष्ट्र परम वैभव की ओर अग्रसर होता है।”
प्रमुख उपस्थिति एवं अध्यक्षता
बैठक की अध्यक्षता श्रीमान् कामेश्वर जी (सद्भाव संयोजक, रज्जू भैया भाग, वैशाली सेक्टर-५) ने की। उन्होंने स्थानीय स्तर पर सामाजिक एकता को सुदृढ़ करने के लिए चलाए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की। कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन में श्रीमान् विजय जी (सद्भाव संयोजक, निशात नगर) की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने क्षेत्र में सद्भाव गतिविधियों के विस्तार पर चर्चा की।
बैठक के मुख्य बिंदु:
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पंच परिवर्तन: समाज में कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवनशैली, नागरिक कर्तव्य और सामाजिक समरसता के भाव को जगाने पर चर्चा हुई।
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शताब्दी संकल्प: उपस्थित प्रबुद्ध जनों ने आगामी वर्ष में सामाजिक कुरीतियों को दूर करने और सेवा कार्यों में सक्रिय भागीदारी का संकल्प लिया।
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सामूहिक विमर्श: बैठक में विभिन्न समुदायों के बीच आपसी संवाद और विश्वास बढ़ाने के व्यावहारिक तरीकों पर विचार-विमर्श किया गया।
समाज की एकता ही राष्ट्र की शक्ति – कृष्ण कुमार जी
कुशल संचालन
कार्यक्रम का प्रभावी मंच संचालन श्रीमान् मदन मोहन तिवारी जी , श्रीमान् साकेत मणि त्रिपाठी जी द्वारा किया गया।
समरसता भोज और समापन
बैठक का विधिवत समापन राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक गायन के साथ हुआ। राष्ट्रगीत की धुनों ने उपस्थित जनसमूह में राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव जाग्रत किया।
कार्यक्रम की एक विशेष उपलब्धि ‘सामाजिक समरसता भोज’ रहा। बैठक के उपरांत सभी उपस्थित जनों ने एक साथ बैठकर भोजन ग्रहण किया। यह सहभोज समाज के सभी वर्गों के बीच की दूरियों को मिटाने और ‘एक परिवार’ के भाव को जीवंत करने का प्रतीक बना। भोजन वितरण के दौरान सदस्यों ने अनौपचारिक चर्चा के माध्यम से सामाजिक एकता के संदेश को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर महानगर के प्रबुद्ध नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे।




